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पीएचसी व सीएचसी से भी जच्चा-बच्चा को घर पहुंचाएगी एम्बुलेंस

 मैनपुरी, हिन्दुस्तान संवाद। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की सुविधा के लिए डिलेवरी वाहन की व्यवस्था की जा रही है। अभी तक जिला अस्पताल में लागू इस योजना को अब पीएचसी व सीएचसी पर लागू करने का निर्णय लिया गया है।

जनपद के पीएचसी व सीएचसी पर प्रतिमाह होने वाले प्रसव की संख्याओं की सूची मांगी गयी है। अस्पताल में शत प्रतिशत प्रसव कराये जाने तथा प्रसूता की जान की रक्षा के लिए शासन द्वारा जननी सुरक्षा योजना के बाद जच्चा-बच्चाा को घर तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए वाहन की व्यवस्था की गयी है। पूर्व में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला महिला अस्पताल के लिए यह व्यवस्था लागू की गयी थी। विभाग ने निर्णय लिया है कि अस्पताल में प्रसव कराये जाने पर अस्पताल की एम्बुलेंस गाड़ी जच्चा-बच्चा को नि:शुल्क उसके घर तक सुरक्षित पहुंचाने का कार्य करेगी।

इसके लिए शासन द्वारा अस्पताल को धनराशि उपलब्ध करायी जाएगी। जिला महिला अस्पताल के बाद अब शासन ने ग्रामीण अंचल में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी वाहन सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। सीएमओ डा. एमएम अग्रवाल ने बताया कि विभाग द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जनपद के जिन पीएचसी तथा सीएचसी केन्द्रों पर 10 बैडों की व्यवस्था है तथा प्रतिमाह 150 प्रसव कराये जा रहे हैं।

इन केन्द्रों पर वाहन की व्यवस्था लागू की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि करीब आधा दर्जन ग्रामीण अंचल के स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे हैं जहां 150 के लगभग प्रसव प्रतिमाह कराये जा रहे हैं। इन केन्द्रों की सूची शीघ्र ही निदेशक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के पास भेजी जाएगी।

यहां एम्बुलेंस तैनात कर प्रसव पीडिम्ता को लाने तथा प्रसव के बाद जच्चा-बच्चाा को घर वापस छोड़ने का कार्य किया जाएगा। अस्पताल तक पहुंचने में खर्च होते थे 500 से 1000 रूपए मैनपुरी। प्रसव पीडिम्ता को अस्पताल तक पहुंचाने तथा प्रसव के बाद जच्चा-बच्चाा को घर तक पहुंचाने के लिए परिजनों को लगभग एक हजार रूपए तक का खर्च ङोलना पड़ता था। शासन के निर्देश पर विभाग द्वारा लागू की जा रही इस योजना के बाद लोगों को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। लोगों को अस्पताल पहुंचाने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। जननी सुरक्षा योजना में किराये के रूपयों को पचा जाती है आशामैनपुरी।

शासन द्वारा लागू जननी सुरक्षा योजना के तहत अशाओं के माध्यम से प्रसव पीडिम्ता को किराये के रूप में 600 रूपए दिये जाने का प्रावधान है। लेकिन आशाएं इस धनराशि को स्वयं ही पचा जाती हैं। प्रसव पीडिम्ता तथा उसके परिवार को इस धनराशि का लाभ नहीं मिल पाता है।

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