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लोकायुक्त बिल में खामियों की भरमार : वर्धन

पटना (हि.ब्यू.)। सीपीआई के महासचिव ए.बी.वर्धन ने कहा कि बिहार के लोकायुक्त बिल में खामियों की भरमार है। बुधवार को वर्धन ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि नये कानून में लोकायुक्त पर राज्य सरकार का नियंत्रण साफ-साफ दिख रहा है। इसलिए इसे अच्छा कानून कहना ठीक नहीं है।

मुख्यमंत्री की सेवा यात्रा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार सरकारी खर्चे पर चुनावी यात्राा कर रहे हैं। ऐसी यात्राओं से लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं होता। श्री वर्धन ने कहा कि लोकायुक्त की चयन समिति पर भी सरकारी पक्ष हावी है। भले ही इसमें मुख्यमंत्री नहीं शामिल होंगे लेकिन विधान परिषद के सभापति और विधानसभाध्यक्ष तो सत्तारूढ़ दल से ही होते हैं।

समिति पर दबाव बनाये रखने के लिए सरकार ने विपक्ष के नेता को इससे अलग कर दिया है। इस स्थिति में हाईकोर्ट के न्यायधीश को चयन समिति में रखने का कोई मतलब नहीं है। इसी प्रकार शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान को भी तत्काल खत्म किया जाना चाहिए। अगर कोई बेवजह शिकायत करता है तो उस पर अलग से भी कार्रवाई हो सकती है।

वर्धन ने कहा कि अगले वर्ष 27-31 मार्च तक पटना में सीपीआई का 21वां महाधिवेशन होगा। इसमें देश भर के दो हजार डेलीगेट शामिल होंगे। महाधिवेशन में बिहार समेत देश की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी। उन्होंने प्रधानमंत्री और सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने जबकि न्यायपालिका की निगरानी के लिए राष्ट्रीय न्यायिक आयोग बनाने की मांग की।

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