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1545 करोड़ के प्रोजेक्ट पर छाया अंधेरा

रांची। नक्सल प्रभावित जिलों को रोशन करने की राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना फ्लॉप हो गई है। 10 साल में 1545 करोड़ का प्रोजेक्ट जमीन पर नहीं उतर पाया है। कभी गेंद पीजीसीआइएल के पास तो कभी जेएसइबी के पास फेंका जाता रहा। राज्य सरकार अब तक तय नहीं कर पाई है कि ग्रिड सब स्टेशन का निर्माण कौन करेगा।

राज्यभर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 20 पावर ग्रिड का निर्माण किया जाना था। इन पावर ग्रिडों की कुल क्षमता 6180 एमवीए की होती। इसके लिए राज्य सरकार ने कई स्वतंत्र विद्युत आपूर्तिकर्ताओं (आइपीपी) के साथ एमओयू भी किया था। सभी एमओयू अधर में लटक गए। इस योजना की खास बात यह थी कि इन सभी पावर ग्रिड से कई महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन भी जोड़े जाने थे।

इन पावर ग्रिड से जोड़े जाने वाले कई ऐसे ट्रांसमिशन लाइन थे, जिनसे नक्सल क्षेत्र में निर्बाध विद्युत आपूर्ति होती। निर्माण कार्य जुलाई 2011 तक ही पूरा किया जाना था। ग्रिडों में लगेगा स्मार्ट ग्रेड सिस्टमरांची। राज्य में पहली बार पावर ग्रिडों में स्मार्ट ग्रेड सिस्टम लगाया जाएगा। इसे लगाने में 25 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

पावर फाइनांस कॉरपोरेशन (पीएफसी)ने इसकी स्वीकृति दे दी है। आरएपीडीआरपी योजना के तहत इसका निर्माण कार्य किया जाएगा। अब तक देश के नौ राज्यों में यह सिस्टम लगाया जा चुका है। सिस्टम की खासियत यह है कि प्रोग्रामिंग ऑटोमेटिक होगा।

अब तक लोडशेडिंग की स्थिति में एक फीडर बंद कर दूसरे फीडर को बिजली दे दी जाती है। कभी-कभी अनावश्यक बिजली भी दूसरे फीडर में सप्लाई की जाती है। इस पर अंकुश लगेगा। मैन पावर का हस्तक्षेप नहीं होगा। समय के हिसाब से लोडशेडिंग की जाएगी।

समय समाप्त होने पर ऑटोमेटिक उस इलाके की विद्युत आपूर्ति शुरू हो जाएगी। जेएसइबी इसे पायलट मॉडल के रूप में शुरू करेगा। अब तक ग्रिड का कंट्रोल मैनुअल हो रहा है। इस सिस्टम से बिजली वितरण की व्यवस्था पूरी तरह से ऑटोमेटिक हो जाएगी। हर ग्रिड में ऑटोमेटिक ब्रेकर लगाया जाएगा, जिससे लाइन अपने आप चेंज होगी।

स्वीच ऑन-ऑफ करने से निजात मिलेगी। वहीं सब स्टेशन अपग्रेड करने में जेएसइबी 100 करोड़ खर्च करेगा। ट्रांसफारमर की रेटिंग 45 से 50 फीसदी बढ़ाई जाएगी।

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