DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

रिवॉल्वर का फर्जी लाइसेंस बनवाने वाला ठग गिरफ्तार

 

खुद को फौज में कैप्टन बताने वाले एसपी सिंह ने परिचित संतोष कुमार मिश्र से रिवॉल्वर का लाइसेंस बनवाने के नाम पर 25 हजार रुपए ठग लिए। एसपी सिंह ने संतोष का महाराष्ट्र से फर्जी लाइसेंस बनवा दिया। मामला खुला तो संतोष ने पुलिस से शिकायत की। जब पुलिस ने उनकी न सुनी तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेशों पर एसपी सिंह के खिलाफ नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज हुई। गुरुवार को पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दिया।

विष्णुपुरी कॉलोनी में रहने वाले संतोष ने बताया कि सन 2003 में उनकी मुलाकात एसपी सिंह से हुई थी। उस दौरान संतोष एक सेकेन्ड हैंड बस का संचालन करते थे। एसपी सिंह ने अपने आपको फौज से रिटायर्ड कैप्टन बताते हुए संतोष से दोस्ती बढ़ाई। संतोष ने बताया कि  एक दिन एसपी सिंह ने उनसे कहा कि बस संचालन में बचत नहीं है, अगर संतोष चाहें तो वह उनकी मुंबई, दिल्ली, चैन्नई या किन्हीं भी दस बड़े शहरों में दस-पंद्रह हजार तक की नौकरी आसानी से लगवा सकता है, मगर उसके लिए उसे रिवॉल्वर का लाइसेंस बनवाना पड़ेगा। संतोष ने बताया कि उसने एसपी सिंह से शहर में ही लाइसेंस बनवाने के लिए कहा तो उसने अपना लाइसेंस दिखाते हुए कहा कि अगर महाराष्ट्र के अहमदनगर से लाइसेंस बनवाया जाए तो पूरे भारत में रिवॉल्वर ले जाई जा सकेगी। एसपी सिंह ने लाइसेंस का 25 हजार रुपए खर्चा बताया।

संतोष ने कहा कि उसने अपनी बस बेचकर 25 हजार रुपए का इंतजाम करके एसपी सिंह को दे दिया। उसके बाद महाराष्ट्र के अहमदनगर से उसके रिवॉल्वर का लाइसेंस बनकर आ गया। उस लाइसेंस के आधार पर संतोष ने स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री से रिवॉल्वर खरीद ली। संतोष के मुताबिक उसके बाद उसी लाइसेंस का दो बार दो-दो हजार रुपए देकर नवीनीकरण हुआ। संतोष ने बताया कि दो हर बार दो हजार रुपए देकर नवीनीकरण कराना उनके लिए महंगा पड़ रहा था इस कारण सन 2009 में उन्होंने शहर के डीएम से सम्पर्क कर उनसे यहां पर लाइसेंस को ट्रांसफर कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। डीएम कार्यालय से अहमदनगर से एनओसी के लिए लिखापढ़ी की गई। संतोष के मुताबिक लिखा-पढ़ी के दस महीने बाद भी एनओसी नहीं आई।

संतोष के मुताबिक अपनी एनओसी के लिए वह खुद महाराष्ट्र पहुंचा। वहां चेकिंग के दौरान संतोष को बांद्रा क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने पकड़ लिया। संतोष ने उन्हें पूछताछ में सारी जानकारी दी। उसके बाद क्राइम ब्रांच के लोगों ने अहमदनगर डीएम के यहां पता किया तो संतोष के नाम पर लाइसेंस की जानकारी वहां से नहीं मिली। इसपर संतोष को अपने साथ हुए फर्जीवाड़े का पता चला। उसने न्यायलय की शरण ली जिसके बाद 29 नवम्बर को एसपी सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया। गुरुवार को पुलिस ने रावतपुर तिराहे के पास से एसपी सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
----------------------------------
बटालियन के पते पर बनवाया था लाइसेंस
संतोष का लाइसेंस आर्मी के कोड पर बनवाया गया था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई कि संतोष के लाइसेंस में स्थाई पता शहर का दिया हुआ था, जबकि अस्थाई पते पर 56 एपीओ लिखा हुआ था। एपीओ आर्मी का कोड होता है और संतोष सिविलियन था। इस कारण डीएम के यहां रिकार्ड में उसका नाम नहीं मिला।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:रिवॉल्वर का फर्जी लाइसेंस बनवाने वाला ठग गिरफ्तार