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क्रिकेट- ऑस्ट्रेलिया दौरे की सबसे बड़ी चुनौती

भारतीय क्रिकेट टीम वर्ष 2011 के सबसे चुनौती भरे दौरे पर ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुकी है। हर कोई जानता है कि ऑस्ट्रेलिया अपने घरेलू मैदानों में खतरनाक टीम है। गेंद-बल्ले और फील्डिंग के मामले में इस दौरे की चुनौतियां जगजाहिर हैं। साथ ही एक दूसरी चुनौती भी है- जुबानी जंग की चुनौती। मैदान में खेल के साथ ही इस चुनौती के लिए भी टीम इंडिया को कमर कसनी होगी। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी स्लेजिंग के लिए क्रिकेट की दुनिया में कुख्यात रहे हैं। पिछले दौरे में ही ‘मंकीगेट कांड’ हुआ था।

उस दौरे में सिडनी टेस्ट मैच के तीसरे दिन हरभजन सिंह बल्लेबाजी कर रहे थे, तो एंड्र सायमंड्स से उनकी कहा-सुनी हुई। सायमंड्स द्वारा लगातार उकसाने पर भज्जी ने उसका जवाब दे दिया। फिर क्या था, कप्तान रिकी पॉन्टिंग की त्योरियां चढ़ गईं और उन्होंने मैच रैफरी से शिकायत कर भज्जी पर नस्लवादी टिप्पणी का आरोप लगाया। आईसीसी के नियमों में यह लेवल तीन का अपराध है। ऐसा आरोप साबित होने से खिलाड़ी पर दो से चार टेस्ट मैच या चार से आठ वन डे का प्रतिबंध लगता है। मामले की सुनवाई में करीब छह घंटे की बहस के बाद पता पड़ा कि हरभजन पर तीन टेस्ट मैच की पाबंदी लग गई है। मामला इतना बढ़ा कि भारत ने दौरा रद्द करने का फैसला तक कर लिया।

आईसीसी ने इस मामले की सुनवाई के लिए न्यूजीलैंड के जस्टिस जॉन हैन्सन को जिम्मेदारी सौंपी। जहां रिकी पॉन्टिंग आरोपों को साबित करने के लिए पूरी तैयारी के साथ गए थे। लेकिन शाम तक भज्जी को क्लीन चिट मिल गई। इस बार न तो हरभजन भारतीय टीम का हिस्सा हैं और न ही सायमंड्स ऑस्ट्रेलिया की टीम में शामिल हैं। फिर भी मैदान में जुबानी जंग तो तय है। भारतीय खिलाड़ियों को इस बात की भी परवाह करनी होगी कि कहीं जुबानी जंग का असर उनके खेल पर न पड़े। जैसे मंकीगेट कांड के बाद भारतीय टीम को सिडनी टेस्ट में हार का सामना करना पड़ा था। हार भी ऐसी, जो सिर्फ मानसिक तनाव की वजह से हुई थी। माइकल क्लार्क के एक ओवर में भारत के तीन विकेट गिरे और भारत हार गया।

महेंद्र सिंह धौनी तब एक खिलाड़ी के तौर पर टीम के साथ थे। तब अनिल कुंबले टीम इंडिया के कप्तान थे। अब धौनी कप्तान हैं। उनके जेहन में वे सारी बातें ताजा होंगी। वैसे तो भारतीय टीम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, लक्ष्मण और सहवाग जैसे सीनियर खिलाड़ी मौजूद हैं, लेकिन धौनी को बाकी खिलाड़ियों को तीन बातें समझानी होंगी। पहली यह कि के कंगारुओं की जुबानी जंग की चाल से कैसे बचें। दूसरी, जुबानी जंग का जवाब दें, लेकिन खेल की मर्यादा में। तीसरी, इस जुबानी जंग के चलते मैदान में खेल की गरमी चाहे जहां तक पहुंचे, लेकिन दिमाग को ठंडा रखें। कंगारुओं को करारा जवाब देने का यही एक तरीका है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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