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दार्शनिक के उद्गार

वे कहते हैं कि हम असफल किस्म के लोग हैं। लेकिन सही मायने में यह बात वॉलस्ट्रीट वालों पर लागू होती है। उन्हें हमारे पैसे से उबारा गया। वे यह भी कहते हैं कि हमें निजी संपत्ति की कदर नहीं है, लेकिन मैं कहता हूं कि अगर हम पूरे हफ्ते दिन-रात उनकी निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाएंगे, तब भी वे उससे कहीं ज्यादा 2008 के आर्थिक संकट में हमारी गाढ़ी कमाई नाश कर चुके हैं। हम कुछ भी नष्ट नहीं कर रहे, हम तो एक व्यवस्था कैसे नष्ट होती है, इस बात के गवाह बन रहे हैं।

काटरून फिल्मों के उस मशहूर दृश्य से आप सभी परिचित होंगे, जिसमें एक बिल्ली ढलान पर पहुंचती है, फिर फिसलना शुरू करती है, बिना यह जाने कि नीचे गड्ढा है। जब तक वह नीचे देखे, तब तक काम तमाम हो चुका होता है। हम वॉलस्ट्रीट वालों को खबरदार कर रहे हैं कि अरे, नीचे देखो! ...अगर कम्युनिस्ट होने का मतलब 1990 में पतन होने वाली व्यवस्था है, तब तो हम कम्युनिस्ट नहीं हैं।

याद रखिए, वही कम्युनिस्ट आज के क्रूर और सबसे योग्य पूंजीवादी हैं। आज अमेरिकी पूंजीवाद के मुकाबले चीन का पूंजीवाद ज्यादा गतिशील हो चुका है, जिसे लोकतंत्र की भी दरकार नहीं। इसलिए जब आप पूंजीवाद की आलोचना करते हैं, तो अपने आपको इस तरह ब्लैक मेल मत होने दीजिए कि लगने लगे कि आप लोकतंत्र के भी विरोधी हैं। हम बस एक बेहतर जीवन स्तर चाहते हैं और हमें इसी के लिए संघर्ष करना चाहिए। (ऑकुपाई वॉलस्ट्रीट के दौरान दिए गए स्लावोज जिजेक के भाषण का एक अंश)
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