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अपनों और सपनों पर न पड़े महंगाई की मार

छोटी-छोटी बचत और खर्च में कटौती करने में महिलाओं का कोई सानी नहीं। पहले जिन बातों को महिलाओं की कंजूसी बताया जाता था, वही अब गांठ में कुछ रखकर चलने की सोच मध्यम आय वर्ग के परिवारों की जरूरत या कहें समझदारी बन गई है। कैसे छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर बचाएं पैसे, बता रही हैं पूनम जैन

बढ़ती महंगाई और उस पर मंदी से जुड़ी आशंकाओं का सबसे पहला हमला आम आदमी की जेब और उसके सपनों पर होता है। इन हमलों से हर रोज दो-चार होती हैं घर की महिलाएं। अपने परिवार की सुरक्षा और पालन-पोषण की जिम्मेदारी को समझते हुए वे अपनी छोटी चादर में ही पैर समेटने की हर संभव कोशिश में  लगी रहती हैं। यही वजह है कि पहले जहां आय और व्यय का हिसाब घर के पुरुषों के हाथ में रहता था, वहीं महिलाएं भी खर्चो में कटौती से लेकर आय बढ़ाने के उपायों में बराबरी की भूमिका निभा रही हैं। आखिरकार, पैसा बचाना कहीं भी पैसा कमाने से कम तो नहीं है।

मिलकर हिसाब लगाने में है समझदारी
निम्न और मध्यम आय वर्गीय परिवारों में आय-व्यय में संतुलन बनाने की जरूरत हमेशा ही बनी रहती है। पर पहले जहां बचत करने का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए कुछ जमा करना होता था, वहीं अब निरंतर बढ़ती कीमतों ने नियमित खर्चो पर भी लगाम लगाने की जरूरत पैदा कर दी है।  वित्त और उपभोक्ता मामलों की जानकार शीतल कपूर मानती हैं, ‘बढ़ती महंगाई का सामना करने का अच्छा तरीका बजट बनाना है।

पति-पत्नी मिलकर बजट बनाएं, यदि बच्चे थोड़े बड़े हैं तो उन्हें भी अपने साथ शामिल करें। उन्हें भी जरूरी और गैर-जरूरी खर्चो का अंतर पता चलेगा। आपके बजट में आय, व्यय, लोन का भुगतान और आपात खर्चो को पूरा करने की व्यवस्था होनी चाहिए। आपकी आय का तीस से चालीस प्रतिशत से अधिक का हिस्सा लोन व किस्तों के भुगतान में नहीं जाना चाहिए।       

समझौता सुविधा से करें, जरूरत से नहीं
बूंद-बूंद से सागर भरता है, पर आवश्यक खर्चो पर कैंची लगाना समझदारी नहीं है। भविष्य पर असर डालने वाले खर्च जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य पदार्थो की गुणवत्ता आदि से समझौता न करें। लग्जरी यानी सुविधा और जीवनशैली से जुड़ी वस्तुओं में ही कटौती करें। उदाहरण के लिए अपने 21 इंच के कलर टीवी को बदलकर एलसीडी लेने की इच्छा पर रोक लग सकती है, पर बच्चों की पढ़ाई या स्वास्थ से जुड़े खर्चों से समझौता करना ठीक नहीं। इसी तरह वॉटर प्यूरीफायर खरीदना अधिक बेहतर है, बनिस्पत की पानी से जुड़ी बीमारियों के लिए डॉक्टरों के चक्कर लगाना।

खाने में सस्ते विकल्पों पर डालें नजर
इन दिनों एक विज्ञापन पर आपकी नजर गई होगी, जिसमें दूध के पौष्टिकता को ग्रहण करने के लिए विटामिन डी वाले सप्लीमेंट पाउडर को मिलाने की बात की है। पर सच यह भी है कि धूप में थोड़ी देर बैठना या खेलना विटामिन डी की पूर्ति कर देता है। इसलिए विज्ञापनों के भुलावे से बचें। पर, डॉक्टर की फीस न देनी पड़े, इसके लिए स्थानीय कैमिस्ट से दवा लेने का लोभ न करें। ऐसे में आप सरकारी हॉस्पिटल या फिर प्राइवेट हॉस्पिटल में सामान्य ओपीडी में दिखा सकती हैं।

मैक्स हॉस्पिटल में डाइटीशियन रितिका सामदार के अनुसार, पोषण के लिहाज से यह कतई आवश्यक नहीं है कि महंगे फल-सब्जी या मेवा खाए जाएं। आप मौसमी फल-सब्जियों को चुनें। ये तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं और पोषक तत्वों से भरपूर भी। किवी और स्ट्रॉबेरी महंगे फल हैं, ऐसे में एंटी ऑक्सीडेंट और विटामिन-सी की पूर्ति के लिए आप अमरूद, आंवला आदि चुन सकते हैं।

इसी तरह धनिया और पालक तुलनात्मक रूप से सस्ते हैं और इनमें आयरन, फाइबर, क्लोरोफिल, बीटाकेरोटीन भरपूर मात्र में होते हैं। इसी तरह आप गेहूं के साथ सोया, चना और रागी को पिसवा लें, इसमें प्रोटीन और फाइबर दोनों भरपूर मात्र में मिल जाएंगे। दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं, पर इनके दाम आसमान छू रहे हैं, प्रोटीन की इस कमी को आप भोजन में सोयाबीन शामिल करके पूरा कर सकते हैं। पपीता, शिमला मिर्च और गाजर ऐसी चीजें हैं जिनमें विटामिन-ए भरपूर होता है। आप इन्हें कच्चा खाएं तो यह कई बीमारियों से बचने में भी आपकी मदद करेगा।

खर्चों की कटौती या बचत को समझने के लिए जीवनशैली को समझना भी जरूरी है। बाहर की तुलना में आप घर में अधिक सस्ता व स्वास्थ्यवर्धक भोजन कर सकती हैं। एक सामान्य रेस्तरां में कॉफी के कप के लिए घर की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत अधिक कीमत आपको चुकानी पड़ती है। इसी तरह यदि घर के हर सदस्य को अलग-अलग वाहन का इस्तेमाल करने की आदत है तो आप एक साथ आना जाना या फिर सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करना चुन सकते हैं। कॉस्मेटिक के सामान, महंगे परफ्यूम, पार्टियों व कार्यक्रमों का आयोजन व मनोरंजन के साधनों पर खर्च कम करने की गुंजाइश काफी अधिक होती है, बशर्ते आप विज्ञापनों और दिखावे के चक्कर में न पड़ें।

आय बढ़ाने पर ध्यान दें
बचत की दिशा में गैर जरूरी खर्चो में कमी करना सबसे पहला कदम है। अगर आपने पहला कदम तय कर लिया है, तो दूसरे कदम के तौर पर अपनी आय बढ़ाने के स्नोतों पर ध्यान दें। यदि आपने परिवार और बच्चों को समय देने के लिए नौकरी छोड़ दी है तो आप पार्ट-टाइम या घर से काम करने के विकल्प पर विचार करें। इनके लिए अब विकल्प पहले की तुलना में काफी हैं। सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, फैशन, क्रेश (छोटे बच्चों की देखभाल), ट्यूशन आदि के काम आमदनी को बढ़ा सकते हैं। आय बढ़ाने के तौर पर आप घर के किसी हिस्से को किराए पर देने का भी विचार अपना सकते हैं। गुल्लक यानी पिग्गी बैंक आज भी कम कारगर नहीं हैं।

महंगाई को मारने के मंत्र
- सामान्य बिजली, टेलिफोन आदि  के भुगतान में देरी  न करें। बाद में सरचार्ज का भुगतान भी करना होगा। वहीं  ईसीएस, जिसमें भुगतान सीधे आपके बैंक से हो जाता है, आप कुछ छूट भी पाते हैं।
- अपनी देनदारियों को कम से कम रखें। क्रेडिट कार्ड या उच्च ब्याज दर के लोन से शीघ्र मुक्ति पाने की कोशिश करें।
- थोक बाजार या मंडी में सामान सस्ता मिलता है, बशर्ते आपको खरीदारी अधिक  करनी हो। दो या तीन महिलाओं के साथ मिलकर सामूहिक लिस्ट बनाकर खरीदारी करें। आकर्षक छूट भी पा सकेंगी।
- मॉल या सेल में केवल जरूरत का सामान खरीदें। सेल की वस्तु और बाजार में उपलब्ध वास्तविक कीमत को जान लें। अनावश्यक सामान की खरीदारी करके पैसा ब्लॉक न करें।
- महंगाई में कंपनियां दाम में बदलाव न करके वस्तु की मात्र घटा देती हैं। सजग उपभोक्ता की तरह इस पर भी गौर फरमाएं। 
- सामान को सुरक्षित रखने के घरेलू उपायों को अपनाएं। जैसे मूली और गाजर के ऊपरी और निचले हिस्से को काटकर उन्हें ज्यादा दिन तक सुरक्षित रख सकते हैं। साड़ी या कोट आदि को बार-बार ड्राइक्लीन न करना पड़े, उसके लिए उन्हें कपड़े के कवर में रखें।
- बिजली खासतौर पर मोटर, हीटर, एसी और गीजर के इस्तेमाल में खास सतर्कता रखें। इनमें बिजली की खपत अधिक होती है।

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