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गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का दावा हुआ खोखला

राज्य की बिजली व्यवस्था दुरुस्त होने की संभावना क्षीण होती नजर आ रही है। एक बार फिर 19 महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण में पेंच फंस गया है। राज्य सरकार अब तक यह तय नहीं कर पा रही है कि निर्माण कार्य पावर ग्रिड कॉरपोरेशन करेगी या झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड।

सरकार का गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का दावा खोखला साबित हो रहा है। 10 जिलों में 132 केवी डीसी लाइन का निर्माण किया जाना है। इसके लिए 411.20 करोड़ रुपए का प्राकलन भी बना था। ट्रांसमिशन लाइन से लगभग  चार हजार गांवों को बिजली मिलती। इसमें से तीन  ट्रांसमिशन लाइन को छोड़कर शेष 16 लाइन का निर्माण नवंबर 2010 में ही किया जाना था। जबकि तीन ट्रांसमिशन लाइन को पूरा करने के लिए जुलाई 2011 तक का समय दिया गया था। इसको लेकर कई बार ऊर्जा विभाग और जेएसइबी की बैठक भी हो चुकी है, पर नतीजा सिफर रहा है। वहीं बोर्ड मैन पावर की कमी बता रहा है। इस ट्रांसमिशन लाइन से 10 जिलों के लगभग 4000 गांवों को बिजली मिलती।
प्रोजेक्ट का नाम    लंबाई(किलोमीटर) राशि(करोड़ में)
जसीडीह से देवघर   16   5.20 
जसीडीह से मधुपुर   60   19.50
खूंटी से कामडारा    80   26.00
खूंटी से हटिया टू    80   26.00
बुंडू से खूंटी    80   26.00
चांडिल से बुंडू    140   45.50
रामगढ़ से पीटीपीएस   80   26.00
रामगढ़(जेएसइबी) से रामगढ़(डीवीसी) 20   6.50
गिरिडीह(जेएसइबी) से गिरिडीह(डीवीसी) 20   6.50
जमुआ से गिरिडीह   70   22.75
जमुआ से कोडरमा   100   32.50
पाकुड़ से साहेबगंज   200   65.00
गोविंदपुर से मधुपुर   130   42.25
जामताड़ा से मधुपुर   80   26.00
बारीपदा, नोवामुंडी से चाईबासा  170   55.25
बारीपदा से नोआमुंडी   50   16.25
हटिया से रातू    24   7.80
हटिया से नामकुम    30   9.75
दुमका से आम्रापाड़ा   80   26.00

जल्द ही इसका निर्माण कार्य की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।  इस पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।-पीके श्रीवास्तव, डीपीआर, जेएसइबी 

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