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अभी ध्यान देने से ही बन सकेगी बात

देश में आम लोग महंगाई से जूझ रहे हैं, पर इस पर नियंत्रण के लिए पूर्ण रूप से संयुक्त प्रयास नहीं किए गए। रिजर्व बैंक ने जहां जरूरत से ज्यादा ब्याज दरें बढ़ा कर अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार पर लगाम लगा दी, वहीं सरकार ने दैनिक प्रयोग की वस्तुओं की उपलब्धता को उचित कीमत पर सुनिश्चित करने के लिए कोई भी ठोस प्रयास नहीं किया। यही हालात रहे तो देश की आर्थिक स्थिति और खराब होगी। अर्थशास्त्री एस.के. मंडल के अनुसार, यदि सरकार कुछ क्षेत्रों पर अभी भी ध्यान दे तो आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को बढ़ाने व मंदी से निपटने में मदद मिल सकती है। आइये जानें इन उपायों के बारे में-

पूंजी लागत को कम करना व तरलता बढ़ाना
केंद्रीय रिजर्व बैंक को अपनी मौद्रिक नीति में परिवर्तन कर ब्याज दरों को घटाने पर विचार करना चाहिए। पूंजी की तरलता को बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
 
एफडीआई बढ़ाना
सरकार को देश में विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। इसके लिए उसे नीतियों में परिवर्तन करना होगा व विदेशी निवेशकों को भरोसा दिलाना होगा कि उनकी पूंजी यहां सुरक्षित है।

औद्योगिक क्षेत्र को प्रोत्साहन
देश मे इंडस्ट्रियल रिफॉर्म की जरूरत है। सरकार को जल्द भूमि अधिग्रहण को आसान बनाने के लिए कानून लाने के साथ ही श्रम कानून में सुधार करने होंगे। पूंजी की उपलब्धता पर भी ध्यान देना होगा।

ढांचागत विकास
सरकार को इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा। ढांचागत विकास से जहां आम आदमी की आय में व़ृद्धि होगी वहीं उद्योगों की लागत भी घटेगी। ये दोनों देश के विकास में सहायक होंगे।
प्रस्तुति : विवेक तिवारी

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