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लाखों बच्चों के भविष्य पर संकट, नर्सरी दाखिला

नर्सरी दाखिले में उम्र की सीमा को लेकर होईकोर्ट में सरकार की ओर से दाखिले किए गए हलफनामे के बाद लाखों बच्चों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है। इस साल नर्सरी की पढ़ाई पूरी कर चुके बच्चों को एक और साल इसी कक्षा में बैठना पड़ेगा। कोर्ट में दाखिल हलफानामे के बाद स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ अभिभावकों की बेचैनी बढ़ गई है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार की गलत नीति की वजह से नर्सरी की पढ़ाई कर चुके बच्चों को एक साल और नर्सरी की पढ़ाई पूरी करनी पड़ेगी। जबकि स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस साल दाखिला नए तरीके से होगा या पिछले साल से पढ़ाई कर रहे बच्चों को ही फिर से नर्सरी की पढ़ाई करनी होगी।

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक अग्रवाल ने कहा कि सरकार की गलत नीति का खामियाजा अभिभावकों का उठाना पड़ रहा है। नर्सरी की पढ़ाई पूरी कर चुके बच्चों को एक साल और नर्सरी की पढ़ाई करनी पड़ेगी। पिछले साल तीन साल की उम्र में दाखिल हुए बच्चाे ही इस साल भी नर्सरी की पढ़ाई करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार कोर्ट में सरकार के हलफानामें का हम स्वागत करते हैं। सरकार को यह फैसला पहले करना चाहिए। लेकिन, सरकार इसे कठोरता से पालन नहीं कर पा रही थी। उन्होंने कहा कि इस साल तीन साल की उम्र वाले बच्चाों के अभिभावकों पर दाखिले का बोझ नहीं पड़ेगा।

वहीं दिल्ली पब्लिक स्कूल मैनेजमैंट एसोसिएशन के चेयरमैन आरसी जैन का कहना है कि दिल्ली के निजी स्कूलों में करीब दो लाख बच्चों का दाखिला नर्सरी में हुआ था। अब वे ही बच्चे इस साल चार साल के होंगे। ऐसी स्थिति में इन बच्चों के भविष्य के साथ सरकार खिलावाड़ कर रही है। सरकार के साफ करना चाहिए कि इन बच्चों का दाखिला फिर से होगा या यही बच्चे एक साल फिर नर्सरी पढ़ाई करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पिछले दाखिला लेने वाले बच्चों का ही दाखिला हुआ, तो इस साल नए आने वाले बच्चों का क्या होगा। उनके लिए स्कूलों में जगह कहां है।

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