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ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए

ठंडे पानी से नहाना चाहिए या नहीं, यह आपकी सेहत पर निर्भर है। आधी उम्र में तो ठंडे जल से नहाना ही नहीं चाहिए, अगर सेहत बिगड़े। जैसे 40 की उम्र के बाद अमूमन चश्मा लग जाता है। कुछ बुजुर्ग ऐसे भी मिल जाते हैं, जो बारहों महीने ठंडे पानी से नहाते और स्वस्थ रहते हैं। उन्हें न मोटापा, न महंगे इलाज वाले रोग होते हैं और न उनके घुटने ही दुखते हैं। कहने का आशय ठंडा जल और कड़ी मेहनत ही अमृत औषधि बन जाती है। बुजुर्ग ठंड में घूमने अवश्य जाते हैं। नई पीढ़ी को तो ठंड सताती है। गरम कपड़े भी महंगे हैं, फिर फैशन भी है। इस तरह कई कारणों से ठंड उड़ जाती है। आजकल कड़वे दौर में ‘शुगर’ की शिकायत ज्यादा ही हो रही है। उन्हें घूमने की सलाह हल्के व्यायाम के रूप में दी जाती है। ब्लड प्रेशर मरीजों को भी राय दी जाती है कि सुहानी सुबह की सैर करें। मम्मी-पापा के साथ बच्चों भी चल देते हैं। शीतोत्सव के नजारे ही अनोखे हैं।

सुबह के स्कूल में बच्चों कराहते हैं, तो शिक्षक भी कसमसाते हैं। आखिर हैं तो वे भी हाड़-मांस के ही। सुबह चाय-दूध-नाश्ते के बगैर गरमी ही नहीं आती। अलाव-हीटर के बिना काम नहीं चलता। ऐसे में अगर बिजली गई, तो समझाे कि जान आफत में पड़ी। कोहरे की चादर यूं तो गांधीजी की चादर-सी श्वेत-स्निग्ध है, किंतु शीतलहर हिंसा पर उतरती लगती है। कुछ बच्चों सर्दी-बुखार छींक-खांसी से पीड़ित हो जाते हैं। मौसमों की समानता के आधार पर शीत में आठ क्या, 20-30 दिन की छुट्टी देनी चाहिए। ठंड से रंग गोरा होता है। देखे नहीं, यूरोपीय देश और अपना हिमालय। ठंडे-ठंडे पानी की जहां तक बात है, वह गरमी में गरम होकर उड़ जाता है। पानी कम पड़कर बिकने लगता है।

यह रजाई-कंबल, कोट-स्वेटर, मफलर-टोपी का मौसम है। बाजार में हर तरफ यही सब चीजें नजर आती हैं। हीटर, गीजर और इमरसन रॉड जैसी चीजें इसी मौसम में बिना डिस्काउंट के बिकती हैं। वैसे बात सिर्फ ठंड की ही नहीं है। हमारे यहां तो हर मौसम में बाजार का मौसम है। इधर मौसम ने करवट ली और उधर बाजार   सज गए। अब इस ठंडे लेख को बर्फ में लगा देना चाहिए।

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