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चुनौतियों में फंसा इराक

इराक से आखिरी अमेरिकी टुकड़ी के निकलने की तैयारी के साथ राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, ‘वे दिन खत्म हो चुके हैं।’ ओबामा ने इराक को भरोसा दिलाया कि वाशिंगटन हमेशा अच्छे दोस्त की तरह उसके साथ खड़ा रहेगा। साल 2003 में इराक में घुसी अमेरिकी सेना की आखिरी टुकड़ी 31 दिसंबर को लौट रही है। फिलहाल वहां सिर्फ 6,000 जवान हैं। साल 2007 में एक वक्त ऐसा भी आया था, जब इराक में 1,70,000 अमेरिकी सैनिक थे। इराक युद्ध में करीब 4,500 अमेरिकी जवान मारे गए व 32,000 घायल हुए। अरबों डॉलर के इस युद्ध ने अमेरिका में एक राजनीतिक बहस भी छेड़ दी थी। राष्ट्रपति बनते ही ओबामा ने ऐलान किया था कि वह इराक से सेना वापस बुलाएंगे। बहरहाल, इराकी प्रधानमंत्री नूरी अल मलिकी के साथ साझा प्रेस कांफ्रेंस में इराक का मनोबल बढ़ाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘आने वाले वषरे में, ऐसा अनुमान है कि इराकी अर्थव्यवस्था भारत और चीन से भी ज्यादा तेजी से बढ़ेगी। तेल उत्पादन बढ़ने के साथ इराक फिर से इलाके का अग्रणी तेल उत्पादक देश बनने की राह पर है।’दरअसल अमेरिका के लिए यह जरूरी है कि इराक फिर से खुशहाली के दिन देखे। 13 दिसंबर, 2003 को इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को पकड़े गए व तीन साल बाद उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया। सद्दाम को मारने व इराक में अमेरिकी सेना के घुसने पर बहस अब भी होती है। अगर इराक सफल राष्ट्र नहीं बन सका, तो यह बहस अमेरिका पर भी कई आरोप लगाएगी।
डायचे वेले से

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