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लोकपाल का दायरा

देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने के लिए लोकपाल की संकल्पना की गई है। इसके दायरे में कौन आते हैं और कौन नहीं, बेमतलब की बातें हैं। इस पर बहस करना भी समय गंवाने के समान है। जिस समस्या का समाधान कॉमन सेंस से हो जाए, उस पर विशेषज्ञों की राय की जरूरत ही नहीं होनी चाहिए। भ्रष्टाचार के अर्थ में ही इसका दायरा छिपा है। अगर इसका अर्थ भ्रष्ट आचरण मानें, तो यह अवगुण किसी में भी हो सकता है। वह शासक भी हो सकता है और शासित भी। रिश्वत, घोटाले जैसे अपराधों के आरोप सरकारी लोगों पर ही लगते हैं। इस तरह से पूरी नौकरशाही इसके दायरे में आ गई। कार्रवाई तो केवल उसी पर होगी, जो भ्रष्टाचार में लिप्त पाया जाएगा। जिन्हें सरकारी खजाने से वेतन-भत्ता आदि दिया जाता है, वह शासक तंत्र ही तो है। उन्हें एक ही श्रेणी में रखा जा सकता है। दूसरी श्रेणी में उन्हें रख सकते हैं, जो कम तौलते हैं, मिलावट करते हैं और धोखाधड़ी से धन अजिर्त करते हैं। आखिर यह भी तो भ्रष्ट आचरण है। साफ है कि देश का प्रत्येक नागरिक लोकपाल के दायरे  में होना चाहिए।
सोमदत्त शर्मा, सराय रोहिल्ला,
न्यू रोहतक रोड, दिल्ली

इंटरनेट को रोकना
मानव संसाधन विकास व दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल का सोशल नेटवर्किग साइट के जरिये विचारों के आदान-प्रदान पर सेंसरशिप संबंधी बयान एक तरह की खीझ ही है। दरअसल अन्ना के आंदोलन में सोशल नेटवर्किग साइटों ने उत्प्रेरक के काम किए। इससे परेशान होकर ही सरकार ने विचार प्रवाह पर शिकंजा डालने की कोशिश की है। नेताओं को सबसे बड़ा खतरा बौद्धिक गतिविधियों से है। इसलिए उन्हें स्वतंत्र चिंतन और विचारों से डर लगता है।
निखिलेश पाठक
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

खुद को सुधारना होगा
लोकपाल या जन लोकपाल कोई भी देश से भ्रष्टाचार नहीं मिटा सकता। हकीकत यह है कि राजनीतिक पार्टियां स्वार्थ की रोटियां सेंक रही हैं। अन्ना हजारे और उनके जैसे अन्य व्यक्तित्व यदि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं त्याग दें और जनता को एकसूत्री कार्यक्रम स्वीकार करने को कहें, तो भ्रष्टाचार मिट सकता है। यह एकसूत्री कार्यक्रम है, ‘स्वयं को सुधारो।’ यह कार्यक्रम दूसरों को सुधारने के लिए नहीं होगा। इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए न किसी अध्यादेश की आवश्यकता पड़ेगी और न ही संसद के विशेष सत्र की। अन्ना हजारे, बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर जैसी सर्वमान्य हस्तियां इस कार्यक्रम का नेतृत्व करें। इससे जनता पर सीधा असर होगा। लेकिन शर्त यही है कि प्रचारक-प्रसारक को अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा छोड़नी होगी।
फतेह चंद्र शर्मा
लाजपत नगर, पार्ट-2, नई दिल्ली

फ्लाई ओवर की जरूरत
मुंबई में पैडर रोड पर हाजी अली और मरीन ड्राइव को जोड़ने वाला साढ़े चार किलोमीटर का प्रस्तावित फ्लाई ओवर काफी समय से लंबित है। क्योंकि यह फ्लाई ओवर स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और उनकी बहन आशा भोंसले के आवास के पास से गुजरेगा और इसका विरोध दोनों बहनें कर रही हैं। विरोध का कारण गोपनीयता का भंग होना बताया जाता है। यह वजह अमान्य है। जनहित को देखते हुए उन्हें सरकार के साथ सहयोग करना चाहिए। फ्लाई ओवर से यातायात सुगम होगा। पहले भी कई फिल्मी हस्तियों ने लोक कल्याणकारी कामों का विरोध किया है। लेकिन उन्हें जब मनाया गया और काम के फायदे बताए गए, तो वे मान गए। उम्मीद है कि सरकार दोनों ही हस्तियों को भरोसे में लेकर फ्लाई ओवर को बनाएगी।
जसवंत सिंह
शांतिकुंज, नई दिल्ली

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