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4 का जादू भगाए मोटापा : आहार, आसन, प्राणायाम और ध्यान

मोटापा अपने आप में कोई रोग तो नहीं, लेकिन हजार बीमारियों को न्योता देने का कारण जरूर है। तो क्यों न इस मोटापे से दूर ही रहा जाए। थोड़ी सावधानी बरतकर और खानपान सुधारकर मोटापे को कहें बाय-बाय।


मोटापे का अर्थ है शरीर में आवश्यकता से अधिक चर्बी बढ़ने से शरीर का बेडौल हो जाना। यूं तो मोटापा अपने आप में कोई रोग नहीं है, किन्तु यह मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा जोड़ों के दर्द जैसे अनेक घातक रोगों का कारण अवश्य बन जाता है।

मोटे व्यक्तियों में प्राय: अंत:श्रवी ग्रंथियों में असंतुलन के साथ मानसिक एवं भावनात्मक असंतुलन भी पाया जाता है। मोटापे की प्रवृत्ति उन लोगों में अधिक होती है जो अति महत्वाकांक्षी, प्रतिस्पर्धी स्वभाव, डिप्रेशन, ऊब तथा कुण्ठाजनित नीरसता से ग्रस्त होते हैं। ऐसे लोग अपनी सृजनात्मक ऊर्जा को खाने की ओर अधिक खर्च करते हैं। योग ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें शारीरिक, मानसिक तथा भावनात्मक पक्षों का सम्यक इलाज हो जाता है। आसन, प्राणायाम, योग निद्रा एवं ध्यान व आहार का समुचित ध्यान रखकर मोटापे पर काबू पाया जा सकता है।

आसन
अंत:श्रवी ग्रंथियों के स्नव को संतुलित करने, व्यायाम की कमी को पूरा करने तथा मन को तेजस्वी बनाने में आसन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रारम्भ में पवनमुक्तासन, व्रजासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, सूर्य नमस्कार के कुछ चक्रों का अभ्यास जैसे सरल आसन करना चाहिए। धीरे-धीरे अपनी क्षमतानुसार अभ्यास में पश्चिमोत्तानासन, सुप्त व्रजासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, उष्ट्रासन, धनुरासन तथा भुजंगासन जैसे कठिन आसन का भी अभ्यास करना चाहिए। किन्तु पसीना बहाने वाले कठिन आसनों का अभ्यास मोटे लोगों को नहीं करना चाहिए।

भुजंगासन के अभ्यास की विधि
पेट के बल जमीन पर लेट जाइए। दोनों पैरों को आपस में जोड़ लीजिए। हथेलियों को कंधों के बगल में जमीन पर रखिए। अब धड़ को धीरे-धीरे ऊपर उठाइए तथा साथ में हाथ को सीधा कीजिए। नाभि के नीचे का भाग जमीन पर तथा ऊपर का भाग जमीन से ऊपर उठाइए। इस आसन में शरीर सर्प के आकार का हो जाता है। इस स्थिति में श्वास-प्रश्वास सामान्य रखते हुए आरामदायक अवधि तक रुकिए तत्पश्चात वापस पूर्व स्थिति में आइए।

प्राणायाम
प्राणायाम नाड़ी के ऊर्जा अवरोधों को दूर करता है तथा मानसिक एवं भावनात्मक तनाव को कम करता है। इसके लिए सरल कपालभाति, सरल भस्त्रिका, भ्रामरी तथा नाड़ीशोधन प्राणायाम उपयोगी है। किन्तु वे प्राणायाम जो भूख में वृद्धि करते हैं, का अभ्यास नहीं करना चाहिए। सरल कपालभाति एवं भस्त्रिका  जो चयापचय बढ़ाते हैं, वसा कम करते हैं, का अभ्यास किया जा सकता है।

कपालभाति के अभ्यास की विधि
ध्यान के किसी भी आसन जैसे पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन या कुर्सी पर रीढ़,  गला व सिर को सीधा कर बैठ जाइए। हाथों को घुटनों पर मजबूती से रखिए। अब आंखों को हल्का बन्द कर नासिका द्वारा सामान्य श्वास अन्दर लीजिए तथा हल्के-हल्के श्वास बाहर निकालिए। इस क्रिया का अभ्यास 15 से 25 बार कीजिए। धीरे-धीरे इसकी आवृत्ति 4 से 5 मिनट तक कीजिए। किन्तु उच्च रक्तचाप, हाइपर एसिडिटी तथा हाइपर थायराइड से ग्रस्त व्यक्ति इसका अभ्यास योग्य मार्गदर्शन में करें।

योग निद्रा एवं ध्यान
लगातार मानसिक तनाव, भावनात्मक असंतुलन, निराशा तथा कुंठा में जीने वाले अति आहारी मोटे व्यक्तियों के लिए योगनिद्रा एवं ध्यान रामबाण औषधि की तरह उपयोगी है। यह ऐसे व्यक्तियों की जीवन शैली को सुधारता है।

आहार
मोटे व्यक्तियों को लम्बा उपवास नहीं करना चाहिए। ऐसे लोगों को सादा, सुपाच्य, पौष्टिक तथा संतुलित भोजन लेना चाहिए। टमाटर, लौकी, खीरे के रस में नींबू व शहद मिलाकर लें। ककड़ी, कुलथी, टमाटर, पालक, चने की दाल लें। अंगूर, सेब, पपीता तथा संतरा जैसे फल लें। अधिक मात्र में शर्करा, मिठाइयां, वसा, मसाले, दूध तथा दुग्ध पदार्थ, चावल एवं परिष्कृत आहार कम लें। अनाज, फल, दही एवं सब्जियां पर्याप्त मात्र में लेना चाहिए।

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