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5 साल में रेल हादसों में 1220 मरे: रेलवे बोर्ड

भारत में पिछले पांच साल में विभिन्न रेल हादसों में 1200 से अधिक लोगों की जान चली गई। मानवरहित क्रासिंग्स पर हुए हादसों में 717 लोगों की जान गई।

रेलवे बोर्ड ने साल के हिसाब से ये आंकड़े सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी के तहत ठाणे जिला यात्री संगठन के अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा को उपलब्ध कराए हैं। मानवरहित क्रासिंग्स पर वर्ष 2006 से 2007 तक 146 लोगों की मौत हुई। 2007 से 2008 तक 148, 2008 से 2009 तक 129, 2009 से 2010 तक 170 और 2010 से 2011 तक 124 लोगों की मौत हुई।

ट्रेन हादसों में सबसे अधिक लोगों की जान 2010 से 2011 तक गई। इस दौरान मरने वालों की संख्या 374 रही। 2006 से 2007 तक 208, 2007 से 2008 तक 191, 2008 से 2009 तक 209 तथा 2009 से 2010 तक 238 लोगों की मौत हुई।

रेलवे बोर्ड के अनुसार, ट्रेनों के आपस में टकराने की वजह से 2010 से 2011 तक 239 लोगों की जान गई और यह पिछले पांच साल में सर्वाधिक है। इस दौरान हुई कुल मौतों में से 64 प्रतिशत यानी कि 239 मौतें ट्रेनों की आपसी टक्कर की वजह से हुईं। आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार ट्रेन के पटरी से उतरने की घटनाओं में 49 मौतें हुईं। इनमें 2007 से 2008 तक की अवधि के दौरान 13 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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