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बिहार मॉडल पर बने लोकपाल : मोदी

पटना(हि. ब्यू.)। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने केन्द्र सरकार को बिहार के लोकायुक्त की तर्ज पर ही लोकपाल बनाने की सलाह दी है। मंगलवार को जनता दरबार के बाद प्रेस कांफ्रेंस में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का लोकायुक्त इस समय देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे सशक्त हथियार है।

केन्द्र को इसका अनुकरण करते हुए ग्रुप सी और डी के कर्मियों से लेकर प्रधानमंत्री को भी इसमें शामिल करना चाहिए। उपमुख्यमंत्री ने सीबीआई को केन्द्र के नियंत्रण से बाहर करके एक स्वायत्त संस्था बनाने की वकालत की। मोदी ने कहा कि निष्पक्षता बहाल रखने के लिए सीबीआई निदेशक के साथ इसके अभियोजन निदेशक की बहाली वैधानिक चयन समिति से होनी चाहिए।

समिति में प्रधानमंत्री के साथ प्रतिपक्ष के नेता और लोकपाल के अध्यक्ष हों। भाजपा का स्पष्ट मत है कि सीबीआई की जांच और अभियोजन विंग अलग-अलग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे से अलग रखने या उनके कार्यकाल के बाद जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, आईपीसी और सीआरपीसी में पीएम को कोई छूट नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक ऑडर जैसे मामले में पीएम को वंचित किया जा सकता है। एक-दो दिन में लोकपाल बिल संसद में पेश होने वाला है। हम सांसदों से अपील करेंगे कि ऐसा संदेश नहीं जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री को बचाने की कोशिश हो रही है।

उत्तराखंड के लोकायुक्त बिल से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने लोकायुक्त की चयन समिति में सीएम को नहीं रखा है। हटाने का प्रवधान भी बहुत सशक्त है। लेकिन उत्तराखंड में ऐसा नहीं है। वहां मुख्यमंत्री चयन समिति में भी हैं और हटाने की व्यवस्था भी ऐसी नहीं है।

उत्तराखंड में सैंक्सन का अधिकार भी लोकपाल को है। लेकिन ऐसा करने पर बिहार में पीसी एक्ट में संशोधन करना पड़ता और फिर राज्य का बिल लटक जाता। अब केन्द्र ने यह अधिकार लोकपाल को दिया है। अन्ना हजारे के प्रारूप से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि बिहार के कानून की आत्मा और भाव वैसी ही है। शब्दों का हेरफेर हो सकता है।

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