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बेटों के भविष्य के लिए पिता छोड़ रहे नौकरी

वाराणसी अरूण मिश्र। सारनाथ स्टेशन पर तैनात 55 वर्षीय गैंगमैन मनोहर के हाथ जाड़े के दिनों में कांपते हैं। घने कोहरे में डगमगाते पैरों से रेलपटरी की नट-बोल्ट को ठीक करते वक्त उन्हें ठीक से दिखायी नहीं देता। मगर करें भी तो क्या? दो जवान बेटियों की शादी और बेटे के पास कोई नौकरी नहीं होने के कारण आठ से दस घंटे की कड़ी मेहनत करना मजबूरी है।

कल तक वह बेटे-बेटियों की चिंता लिए बेचैन रहते थे लेकिन आज वीआरएस स्कीम ने उन्हें नई जिंदगी दे दी है। डीआरएम कार्यालय लहरतारा में वीआरएस का फार्म जमा कर बाहर निकलते उनके आखों में खुशी दिखी। बोले, अब कोई चिंता नहीं। रेलवे ने वीआरएस स्कीम से एक साथ कई चिंताओं से मुक्ति दे दी है।

रेलवे में नौकरी से बेटे का भविष्य संवर जाएगा और बेटियों की शादी मिलने वाले फंड से कर दूंगा। जिंदगी पेंशन से आराम से गुजर जाएगी। ऐसी सोच केवल मनोहर की नहीं बल्कि पूवरेत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के 183 स्टेशनों पर तैनात 210 रेलकर्मियों की है जो संरक्षा से जुड़े हैं। इन सभी लोगों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया है। इनमें कोई की-मैन पद पर है तो कोई गैंगमैन या चाभीमैन।

रेल पटरी पर जिंदगी के 25 वर्ष गुजारने वाले रामधीन कहते हैं कि पांच साल बचा है नौकरी को। लेकिन, बेटे की पूरी जिंदगी पड़ी है। अफसरों की मानें तो वीआरएस योजना ने हजारों रेलकर्मियों के परिवार को जिंदगी का एक सहारा दे दिया है। यह है वीआरएस योजनारेलवे बोर्ड ने संरक्षाकर्मियों के लिए वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) की घोषणा कर रखी है।

इसके तहत संरक्षा विभाग में काम करने वाले कर्मचारी चाहें तो अपनी जगह बेटे को नौकरी दे सकते हैं। इसके लिए कुछ शर्ते रेलवे ने लागू कर रखी है। की-मैन, गैंगमैन, चाभीमैन, प्वाइंट मैन, शंटर, चालक, गार्ड पदों पर तैनात कर्मचारी इसका फायदा ले सकते हैं। वीआरएस लेने वाले रेलकर्मियों को पेंशन की पूरी राशि मिलेगी और सभी फंड दो माह के अंदर मिल जाएंगे।

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