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दुख देकर सुख?

दिल्ली में रोजगार के अवसर पर्याप्त हैं। लोगों की कमाई बेहतर होती है, तब ही तो जगह-जगह से लोग यहां आते रहते हैं और टिक जाते हैं। अधिकतर लोग महानगरीय रोग से ग्रस्त हैं, पर आश्चर्य है कि सोच नहीं बदली है। तीन-तीन लड़कियां होने पर भी चोरी के बच्चों को बेटे के रूप में रख लेने की घटना तो यही बताती है। चोरों के साथ ऐसे अभिभावकों पर भी केस दर्ज करने का कोर्ट का फैसला इसीलिए उचित है। उनके बारे में तो सोचिए जिनकी संतान गायब हो जाती है। दुख देकर सुखी कैसे रहा जा सकता है!

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