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इन युवाओं के हौसलों से ही हारेगी मंदी और महंगाई

मंदी की आहट और महंगाई की चीख-पुकार के बीच कुछ अच्छी खबरें। टाटा इंस्टीटय़ूट ऑफ सोशल स्टडीज, मुंबई के 30 छात्रों ने फैसला किया है कि इस वर्ष वे कैंपस प्लेसमेंट में नहीं बैठेंगे, अपना बिजनेस करेंगे। संस्थान के छात्रों के लीक तोड़ने की शुरुआत हुई थी पिछले साल, जब 85 प्रतिशत छात्रों ने अपना उद्यम शुरू किया। यहां दिलचस्प यह है कि ये सभी कैंपस प्लेसमेंट में चुन लिए गए थे।

वहीं आईआईटी मुंबई भी नौकरी की बजाय छात्रों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। संस्थान इस बात की गारंटी ले रहा है कि यदि अपना काम करने वाला कोई छात्र नाकामयाब हो जाता है, तो उसे फिर से कैंपस प्लेसमेंट में भाग लेने का मौका दिया जाएगा। ऐसे ही दिल्ली विवि के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एफएमएस) ने अपने छात्रों के लिए खुद का काम-धंधा शुरू करने की नीति लागू कर रखी है।

दिल्ली और मुंबई में युवाओं का हौसला बता रहा है कि युवा परिपाटियों को तोड़ना चाहते हैं। उनमें छिपी प्रतिभा को तराशने के लिए संस्थान रास्ता बना रहे हैं। आईआईटी, मुंबई के प्लेसमेंट सुपरिटेंडेंट सुब्रतो दास ने बताया कि छात्रों में अपना कारोबार करने के प्रति रुझान बढ़ा है।

टीआईएसएस के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड लेबर स्टडीज के प्रमुख प्रो. सत्यजीत मजाूमदार का कहना है कि छात्रों को कंपनी खोलने के लिए फंड भी दिया जाएगा। कंपनी चलने की स्थिति में उनकी फंडिंग भी कराई जाएगी। जहां तक एफएमएस की नीति का सवाल है अगर कोई छात्र व्यवसाय करना चाहता है तो उसे संस्थान को दो महीने पहले सूचना देनी होती है।

इधर, आईआईएम, आईआईटी और डीयू के शहीद सुखदेव ऑफ बिजनेस स्टडीज में स्व-व्यवसाय के इच्छुक छात्रों के लिए इनक्यूबेशन सेंटर भी खोले गए हैं।

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