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रुपये की कमजोरी ने बढ़ाई धड़कन

देश की अर्थव्यवस्था के लिए बुरे संकेत बने हुए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिर रहा है और मंगलवार को वह पहली बार 53 रुपये से नीचे चला गया। सोमवार को शुरुआती कारोबार में एक डॉलर पहली बार 53 रुपये से ऊपर गया, मगर बाद में 52.80 रुपये पर बंद हुआ। विदेशी निवेशकों की निकासी और अन्य प्रमुख मुद्राओं विशेष रूप से यूरो के सामने डॉलर की मजबूती के कारण मंगलवार को भी रुपये में गिरावट बनी रही और एक समय में वह 53.51 रुपये पर पहुंच गया।

आखिर में यह 53.23-24 रुपये पर बंद हुआ। अक्टूबर में औद्योगिक उत्पादन 5.1 प्रतिशत घट जाने के कारण विदेशी निवेशकों की पूंजी निकासी के संकेत के बीच सोमवार को रुपये में 81 पैसे की तेज गिरावट दर्ज की गई थी। डॉलर के दामों में मजबूती आने से देश के निर्यातक भी खुश नजर नहीं आ रहे हैं। अधिकतर निर्यातकों ने पहले से 45-48 रुपये के बीच समझौते कर रखे हैं। जबकि कच्च माल उन्हें महंगे दामों पर आयात करना पड़ रहा है। वहीं, दूसरी तरफ आयातकों के लिए भी मुश्किल बढ़ती दिख रही हैं। आयात महंगा होता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर पेट्रोलियम पदार्थो पर दिखेगा। आयात बिल बढ़ने से तेल कंपनियां पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर हो सकती हैं। आयात किए जाने वाले खाद्य तेल, दालें आदि के दाम भी बढ़ सकते हैं।

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