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बदनाम होंगे, तो क्या नाम न होगा

सुबह के कोहरे और ठिठुरन में मौलाना अपने पोस्ट ऑफिस का पुराना ओवरकोट पहने, कनटोप चढ़ाए मुंह से भाप छोड़ रहे थे। कनटोप मफलर में सिर्फ दाढ़ी नजर आ रही थी। बोले, ‘भाई मियां, सुबह जो चाय पी, भाप बनकर निकल गई। महंगाई में दनादन चाय पीते रहने की अल्लाह ने तौफीक नहीं दी। जिन्हें चुनाव लड़ना है, जाड़े में भी पूरी नंगई पर आमादा हैं। खुदा जाने क्या खाते हैं कि फकत कुर्ता-पाजामा झाड़े घूम रहे हैं। यहां तो ओवरकोट तले हड्डियां शावा..शावा गा रही हैं। बुढ़ापे के भी अपने अंदाज हैं।’

फिर अदरक का एक छोटा-सा टुकड़ा मुंह में डालकर बोले, ‘न्यूजें अलग भाप छोड़ रही हैं। छपा है कि भारत में और बढ़ गया भ्रष्टाचार.. साख घटी। कमाल है। इसमें साख क्या घटी? हम टॉप पर जा रहे हैं। फोकट में थोड़े ही कहा गया है कि सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा (रहने को घर नहीं है, सारा जहां हमारा)। क्रिकेट की तरह हम दनादन भ्रष्टाचार में आगे बढ़ रहे हैं। चीन, पाकिस्तान, नेपाल वगैरह से हम आगे चल रहे हैं। अन्ना, लोकपाल, सरकार अपनी-अपनी जगह और भ्रष्टाचार अपनी जगह। यानी लगे रहो भ्रष्ट भाई। आप से ही देश की रौनक है। अठन्नी लो या आठ करोड़, खेल जारी रहना चाहिए। वरना सीबीआई, लोकायुक्त हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। सरकार पद से बर्खास्त कैसे करेगी? पार्टी से कैसे निकालेगी? अपनी छवि जनता की निगाहों में पारदर्शी कैसे बनाएगी? अब तो चुनाव सिर पर है।’

थोड़ी अदरक और चुगलाकर बोले, ‘भाई मियां, एक चूड़ी से कलाई नहीं सजती। महंगाई के साथ-साथ भ्रष्टाचार भी जरूरी है। अब देखिए न कि बेल पर जेल से बाहर आने पर कनिमोङी का ढेरों फूलों से स्वागत किया गया। क्यों? उसी काम की बदौलत ही न, जिसने उन्हें इतनी ख्याति दिलवाई। मुस्कराती हुई कनिमोङी की ढेरों तस्वीरें उतारी गईं, गोया ‘भारत रत्न’ हासिल करके लौटी हों। अन्ना मुझे माफ करें, दीगर खुराफात की तरह इंडिया को ग्लोबल लेविल पर लाने में करप्शन की अहम भूमिका है। यानी बदनाम भी होंगे, तो क्या नाम न होगा। निगेटिव जूती पहनकर ही सही, पर आगे बढ़ते रहना चाहिए मियां। दैट्स ऑल।’

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