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क्रिएटिविटी का गणित

उनकी धारणा थी कि वह कभी रचनात्मक नहीं हो सकते। क्योंकि उन्हें न कविता लिखनी आती थी, न पेंटिंग करना, न ही वे वैज्ञानिक थे कि कोई आविष्कार ही कर पाते। वह क्रिएटिविटी को कुछ चुनिंदा व्यवसायों से जोड़कर देखते आए थे। उनकी आंखें आखिर चिंतक जिम रॉन के एक लेख से खुलीं। जिम ने कहा कि जो भी जीवन को सही परिप्रेक्ष्य में आंकते हैं, उसे सामर्थ्य और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सही तरीके से जीते हैं, वे क्रिएटिव हैं। जैसे अगर आप महीने में सारे विद्युत उपकरणों का प्रयोग करते हुए भी पड़ोसी की तुलना में कम बिजली खपत करते हैं, तो आप क्रिएटिव हैं। इसी तरह, अगर आपकी जेब में केवल ब्रेकफास्ट के पैसे हों, उतने ही में आपने लंच का प्रबंध कर लिया, तो यह भी आपकी क्रिएटिविटी है। जिम की बातें हमें बताती हैं कि जीवन में हर कदम पर रचनात्मक होने के मौके हैं। हम उनका लाभ नहीं उठाते।

क्रिएटिव होने का अर्थ है, किसी भी काम के नए तरीके खोजना। क्रिएटिविटी की आधारभूत जरूरत विश्वास है। विश्वास यह कि यह काम नए तरीके से हो सकता है। विश्वास करते ही दिमाग आपके लिए काम में जुट जाता है। याद रखें, औसत लोग हमेशा नए तरीकों से चिढ़ते हैं।

पाब्लो पिकासो जब छोटे थे, तो स्कूल में उनके शिक्षक ने नेशनल फ्लैग बनाने को कहा। पाब्लो ने जो फ्लैग बनाया, उसके ऊपर एक पक्षी भी बैठा था। शिक्षक ने कॉपी जांचते वक्त उन्हें इस आधार पर कम नंबर दिए कि उन्हें सिर्फ फ्लैग बनाने को कहा गया था। पिकासो पर इस बात का और इन नंबरों का इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वह नए तरीके से अपना काम करते रहे। पिकासो की सोच वाले आदमी आपके आसपास भी मिल जाएंगे, लेकिन इनकी तादाद शिक्षक की सोच वाले लोगों की तादाद का एक प्रतिशत भी नहीं।

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