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डिब्बाबंद खानों पर आंख मूंदकर न करें विश्वास

मेरे पास आने वाले कितने ही क्लाइंट ऐसे हैं जो पैकेट में पीछे की ओर दी जाने वाली फाइन लाइन को नहीं पढ़ते, जहां चीज में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में लिखा होता है। पैकेट में सामने की और लिखे फैट फ्री, जीरो कोलेस्ट्रॉल जैसे शब्द पढ़ते ही वस्तु की खरीदारी कर लेते हैं। परिणामस्वरूप लंबे समय तक लो फैट बिस्कुट और जीरो कोलेस्ट्रॉल वाली ब्राउन बैड खाकर भी उनके कोलेस्ट्रॉल लेवल और ट्रिग्लीसिराड लेवल में बदलाव नहीं होता।  लो फैट और एनर्जी फूड का सेवन करके भी पूरे दिन थकावट महसूस होती रहती है। जानते हैं डिब्बाबंद पैकेटों पर लिखे रहने वाले कुछ दावों के बारे में..

जीरो कोलेस्ट्रॉल/कोलेस्ट्रॉल फ्री
हालांकि वनस्पति तेल में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता, पर यह वसा ही है। आमतौर पर हम मक्खन का चुनाव करते हैं, क्योंकि इसमें सेचुरेटेड फैट कम होता है। वनस्पति तेल की एक चम्मच में 14 ग्राम वसा और सौ कैलोरी होती है, इतनी ही मात्र एक चम्मच मक्खन क्रीम से मिलती है। ऐसे में खून में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की आशंका बनी ही रहती है। यही कारण है कि कोलेस्ट्रॉल लेवल और वजन में अंतर देखने को नहीं मिलता। बेहतर होगा कि हम वनस्पति तेल के उपभोग की मात्र को सीमित करें। कोलेस्ट्रॉल फ्री खाद्य वस्तुओं में सैचुरेटेड वसा प्रतिशत जानें।

फैट फ्री/लो फैट
यदि किसी खाने के पैकेट पर लो फैट या फैट फ्री लिखा है तो वह खाना सेहत के लिए कितना अच्छा है, इससे जानने के लिए उसके न्यूट्रीशनल फैक्ट्स अवश्य पढ़ें। आमतौर पर इन खानों में प्राकृतिक वसा तो कम होती है, पर कम वसा के कारण स्वाद में आई कमी की क्षतिपूर्ति सोडियम, अधिक शुगर और थिकनर  जैसे इमल्सीफायर मिलाने से कर दी जाती है, जिससे नुकसान की आशंका भी बनी रहती है। उदाहरण के लिए प्रोपीलीन ग्लाइकोल, एक कृत्रिम घोल है, जो खाद्य पदार्थो में इमल्सीफायर के तौर पर इस्तेमाल होता है, इसकी पहचान त्वचा और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाले टॉक्सिक के रूप में भी होती है। इसके अलावा, इस तरह के खानों से संतुष्टि नहीं मिलती, तो इन्हें खाने के बाद आपकी इच्छा और खाने की बढ़ जाती है। सब्जियों में पाए जाने वाले पोषक तत्व जैसे विटामिन ए, डी, ई आदि वसा में घुलनशील होते हैं यानी उन पोषक तत्वों को ग्रहण करने के लिए शरीर को कुछ वसा की जरूरत होती है, पर वसा से दूर रहने के कारण है कि शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। हर समय थकावट महसूस करते हैं और भूख लगती रहती है। 

नो एडीटिव
यह लाइन कुछ खास जूस, ब्रेड और अनाजों पर देखने को मिलती है, पर किसी चीज में शुगर कई तरह से हो सकती है जैसे हाई फ्रक्टोस कॉर्न सिरप, शहद और लेक्टोस आदि। नो एडिटिव व नेचुरल आदि शब्द उलझन को बढ़ा देते हैं, इनके संबंध में नियम भी नहीं है। बेहतर होगा कि शुगर फ्री या नो शुगर आदि शब्दों पर गौर करें। यदि किसी चीज में एक समय के भोजन में 400 से अधिक कैलोरी मिल रही है तो चुनाव समझकर ही करें। 

 

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