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चमत्कार एक दिन में बिलकुल नहीं होते

हार के मोतिहारी के रहने वाले सुशील कुमार जब केबीसी के सीजन पांच में एक प्रतियोगी की हैसियत से अमिताभ बच्चन के सामने पहुंचे तो उन्हें भी इस बात का यकीन नहीं हुआ कि वह हॉट सीट तक पहुंच गये हैं। 27 वर्षीय सुशील को देख कर कोई इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकता था कि यह शख्स 3 लाख 20 हजार रुपए से ज्यादा जीत पाएगा। जब सुशील ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति और अपने बारे में बताया तो लोगों की उसके साथ सहानुभूति तो हुई, लेकिन इस बात का विश्वास उन्हें तब भी नहीं हुआ कि यह व्यक्ति विनर के रूप में उभर सकता है।

सुशील की तनख्वाह छह हजार रुपए महीना थी। वह एक कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम करता था और साथ ही कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपनी आजीविका चलाता था। लेकिन उसके सपने बड़े थे। वह जीवन में कुछ करना और आगे बढ़ना चाहता था। केबीसी के खेल के दौरान सुशील लगातार सवालों के जवाब देता हुआ आगे बढ़ता रहा। जैसे-जैसे वह पांच करोड़ के करीब पहुंचता गया, उसका गला सूखता गया। उसने कई गिलास पानी पिया और खुद को संयमित करने की कोशिश करता रहा। पूरे देश और बिहार की नजरें सुशील पर लगी हुई थीं। और जब उसने पांच करोड़ के सवाल का सही जवाब दे दिया और अमिताभ ने कहा कि वह पांच करोड़ रुपए जीत गये तो सुशील की खुशी का कोई ठिकाना न रहा।

उसने पानी का गिलास तक अपने सिर पर डाल लिया। देश को आम आदमी के रूप में एक नया नायक मिल गया। देखने वाले इसे किसी चमत्कार के रूप में देख रहे थे। वे मान रहे थे कि सुशील की जीत उसके अच्छे भाग्य का ही परिणाम है। लेकिन नहीं, वास्तव में जो चमत्कार हम एक दिन या एक पल में होते हुए देखते हैं, उसके पीछे कितनी तपस्या और मेहनत होती है, इसका अंदाजा चमत्कार को जन्म देने वाला ही जानता है।
 
जीतने के बाद सुशील ने कहा कि वह अपने लिये एक घर बनाएगा, अपने भाइयों को बिजनेस में सैट करेगा और आईएएस की पढ़ाई पर फोकस करेगा। ये सुशील की प्राथमिकताएं थीं। सुशील ने साबित किया कि यदि एक आम आदमी के इरादे मजबूत हों तो वह भी करोड़पति बन सकता है, यानी अपने लक्ष्य को पा सकता है।
मोतिहारी के हनुमानगढ़ी में रहने वाले सुशील की जीवन यात्रा लगभग 27 साल पहले शुरू हुई थी। एक गरीब परिवार में जन्म लेने की जो-जो त्रसदियां हो सकती हैं, वह सब सुशील ने भुगती हैं। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद सुशील ने साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन पूरी की और उसके बाद अपने जिले में ही 6000 रुपए महीने पर कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी करने लगे। कुछ समय पहले ही उनकी शादी भी हो गयी। जब घर का खर्च चलना मुश्किल हो गया तो वह ट्यूशन पढ़ा कर कुछ अतिरिक्त रुपए कमाने लगे।

पत्रिकाएं पढ़ना और लगातार अपनी नॉलेज को अपडेट रखने वाले सुशील को सपने देखने का शौक है। उन्हें हमेशा लगता था कि जिंदगी कभी तो उन पर मेहरबान होगी, कब होगी और कैसे, यह वह खुद भी नहीं जानते थे। लेकिन करोड़पति देखते-देखते मानो उन्हें अपना मकसद मिल गया था। उन्हें लगा कि कौन बनेगा करोड़पति ही उनके जीवन की नैया को पार करा सकता है। बस फिर क्या था, सुशील केबीसी में भाग लेने के लिए लगातार फोन करते रहे। उन्हें यकीन था कि एक न एक दिन उन्हें केबीसी में जाने का मौका मिलेगा। एक तरफ वह फोन करते रहे और दूसरी तरफ अपना ज्ञान बढ़ाते रहे। और जब उन्हें केबीसी में मौका मिल गया तो उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया, ऐसा मौका देने के लिए, जो उनके सपनों को पूरा कर सकता था। और अब उनके सारे सपने उनकी मुट्ठी में हैं। लेकिन पांच करोड़ रुपए जीतने के बावजूद उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं को नहीं बदला है।

सुशील के पास बिग बॉस में जाने का प्रस्ताव भी आया था। वह चाहते तो बिग बॉस में जाकर लाखों रुपए कमा सकते थे, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को यह कह कर ठुकरा दिया कि इससे मेरे विचार और लक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। यानी सुशील अच्छी तरह जानते हैं कि उन्हें कब क्या करना है। वह जीती हुई राशि से गरीब बच्चों की मदद करना चाहते हैं। सुशील कहते हैं, गांव के गरीब बच्चों के लिए 200 रुपए की मदद भी बहुत होती है। साथ ही सुशील आईएएस की तैयारी करना चाहते हैं। पढ़ने के शौक को पूरा करने के लिए सुशील गांव में एक लाइब्रेरी भी खोलना चाहते हैं।

सुशील को मनरेगा (महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्पलॉयमेंट गारंटी एक्ट) का ब्रांड एम्बेसेडर बनाया गया है। वह आजकल इसके विज्ञापनों की शूटिंग में व्यस्त हैं। सुशील अब भी कोई ऐसा काम नहीं करना चाहते, जो उनके स्वभाव या लक्ष्य के विपरीत हो। अनेक लोगों ने उनकी लोकप्रियता को कैश कराने की कोशिश की, लेकिन सुशील ने सबको विनम्रता से मना कर दिया। अपने जीवन में आए इस चमत्कारिक बदलाव पर सुशील साफ कहते हैं, यह कोई एक दिन में नहीं हुआ है। मैंने इसके लिए कठोर परिश्रम किया, तभी मैं पांच करोड़ रुपए जीत पाया हूं। सचमुच, चमत्कार एक दिन में नहीं होते।

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