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चिल्ड्रन बुक इलस्ट्रेटर : ये हैं कहानियों के चितेरे

चिल्ड्रन बुक इलस्ट्रेटर : ये हैं कहानियों के चितेरे

बाल पुस्तक चित्रकार स्कूली पुस्तकों, कहानी की किताबों, पोस्टरों और कला को पोषित करने वाली अन्य प्रकाशित सामग्री में रंगों और रेखाओं के जरिए कहानियां सुनाते हैं। वह इस कार्य के लिए विभिन्न स्टाइल इस्तेमाल करते हैं, जैसे फोटो, पेंसिल स्केच, कंप्यूटर डिजाइन, पेंट और कोलाज छवियां।

बाल पुस्तक इलस्ट्रेटर ऐसे किसी भी प्रकाशन के लिए काम कर सकता है, जहां से ऐसी पुस्तकें प्रकाशित होती हैं, जिनमें आकर्षक छवियों की मदद से नवसाक्षर बच्चों के लिए कहानियां लिखी जाती हैं। यह कलाकार बच्चों की पत्रिकाओं या बड़े प्रकाशन संस्थानों या भारत में बच्चों के लिए ज्ञानवर्धक सामग्री विकसित करने वाली रूम टू रीड और प्रथम सरीखी एनजीओ के लिए भी काम कर सकते हैं।

काम की अवधि
प्रात: 8 बजे : काम की शुरुआत - नेशनल बुक ट्रस्ट असाइनमेंट के लिए इलस्ट्रेशन बनाना
प्रात: 10 बजे : प्रिंटर से भेजे गए पेज के कलर सैम्पलों की जांच
दोपहर 1.30 बजे : प्रकाशक के साथ मीटिंग में पुस्तकों के लिए इलस्ट्रेशनों से संबंधित मीटिंग
4.00 बजे : पुस्तकालय में इलस्ट्रेशंस के लिए रेफरेंस मेटीरियल (किताबें, जर्नल्स और वीडियो) की तलाश। स्केच/नोट बनाना।
सायं 8 बजे : कार्य समापन।

वेतनमान
अंग्रेजी प्रकाशन जगत में इस क्षेत्र में बेहतर तनख्वाहें मिलती हैं, परंतु हिन्दी व अन्य प्रादेशिक भाषाओं में आय कम हो सकती है, क्योंकि वहां पुस्तकों की कीमतें अधिक नहीं होतीं। फ्रीलांसर 25000 से 45000 रुपए प्रतिमाह तक कमा सकते हैं।

हुनर
- आपने जो कार्य किया है, उसके प्रति आत्मविश्वास
- ड्रॉइंग और पेंटिंग तकनीक की गहरी जानकारी
- बाल मस्तिष्क की समझ और उसके हिसाब से काम करने की क्षमता
 
वहां कैसे पहुंचें

यदि आपको किस्से-कहानियां लिखने का शौक है और आपकी चित्रकला भी अच्छी है तो आप बारहवीं कक्षा तक अपने हुनर को तराशते हुए आर्ट स्कूल में दाखिला लेने तक एक अच्छा-खासा पोर्टफोलियो बना सकते हैं।

इस क्षेत्र के अधिकांश कॉलेज एप्टीटयूट टेस्ट लेते हैं। एक अच्छे कला विद्यालय में दाखिला लेने में सफल रहने वाले प्रत्याशियों को ललित कला में चार वर्ष की स्नातक डिग्री करनी होती है, जिसमें उन्हें विजुअल कम्युनिकेशन, ड्राइंग, प्रकृति और वास्तुकला, इलस्ट्रेशन आदि की शिक्षा दी जाती है। इसके बाद ललित कला में स्नातकोत्तर भी कर सकते हैं।

संस्थान
- कॉलेज ऑफ आर्ट, दिल्ली
www.delhi.gov.in
- सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई
www.jjiaa.org/home.htm

पक्ष-विपक्ष
- आमदनी बहुत अच्छी नहीं होती।
- कार्य आपके हुनर, काम समय पर देने और नेटवर्किग क्षमता पर भी निर्भर करता है।
- काम बढ़ जाने पर देर रात तक काम करना पड़ सकता है।

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