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दारोगा जी बोल रहे कैमरा-एक्शन-ओके...

पटना। अतुल उपाध्याय थानों में दारोगा जी अब कैमरा-एक्शन-ओके बोल रहे हैं। उनके इतना कहते ही एक पुलिस वाला बयान दे रहे शख्स पर फोकस करता है और पूरा बयान रिकार्ड। बिहार पुलिस के काम का यह नया तरीका है जिसे धीरे-धीरे सभी जिलों में लागू किया जा रहा है।

दरअसल पुलिस ने परंपरागत काम-काज के ढर्रे में अब वैज्ञानिक पुट भी डालना शुरू किया है। पुलिस की योजना है कि गंभीर अपराधिक मामलों को दर्ज करने से लेकर उनके इंवेस्टिगेशन तक में वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल हो। यह आम शिकायत थी कि बिहार पुलिस सिर्फ कागजों पर चलती है।

बयान देने वाले ने जो कह दिया वह दर्ज हो गया। उसी आधार पर इंवेस्टिगेशन भी हो गया और चार्जशीट तक फाइल कर दी गई। भले बाद में बयान दर्ज कराने वाला कोर्ट में पलटी मार जाए। इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि पुलिस की तरफ से भी बयान से छेड़छाड़ की आशंकाएं जताई जाती रही हैं।

इनसे बचने के लिए राज्य पुलिस मुख्यालय ने जिलों के एसपी को निर्देश दिया है कि गंभीर मामलों में शिकायतकर्ता और उसके बयान को वीडियो से फिल्माया जाए ताकि बाद में उसे सबूत के तौर पर भी पेश किया जा सके। यह तो रही बयान को रिकार्ड करने की बात। लेकिन योजना इसके आगे की भी है।

वैज्ञानिक अनुसंधान पर फोकस करते हुए यह भी तय किया गया है कि अपराध से संबंधित साक्ष्य जुटाने के लिए हर जिले में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल)की टीम जाएगी। कोशिश यह हो रही है कि हत्या व दूसरे संगीन अपराधों में खून के नमूने और अन्य सबूत इकठ्ठा करने के लिए हर जांच में एफएसएल की मदद ली जाए।

यह प्रयास शुरू किया गया है कि मामलों का वैज्ञानिक अनुसंधान हो। इसके तहत हर जिले के एसपी को कहा गया है कि थानों में दर्ज बयान की वीडियो रिकार्डिग कराएं। कुछ मामलों में यह प्रक्रिया शुरू भी की गई है। साथ ही मामलों की जांच में एफएसएल टीम की मदद लेने को कहा गया है। फिलहाल हर जिले में चार-पांच मामलों में ऐसा हो रहा है। कई जिलों में एफएसएल की टीम उपलब्ध हैं। आने वाले दिनों में वैज्ञानिक अनुसंधान में और तेजी आएगा।’-अभयानंद, डीजीपीं

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