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छह माह से भूमिगत कर्मचारी नेता को हाईकोर्ट का झटका

मैनपुरी, हिन्दुस्तान संवाद। छह माह से जिले से फरार चल रहे कर्मचारी नेता योगेन्द्र सिंह चौहान को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जुर्माने की सजा सुनाई है। उच्च न्यायालय ने एक ही तथ्यों पर तीन याचिकाएं दायर करने का कर्मचारी नेता को दोषी माना है और उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

स्वास्थ्य विभाग मैनपुरी में वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत रहे कर्मचारी नेता योगेन्द्र सिंह चौहान के विरुद्ध थाना कोतवाली मैनपुरी में दर्ज कराई गयी तीन रिपोर्टो पर विवेचना की जा रही है। निदेशक प्रशासन स्वास्थ्य हिमांशु कुमार ने कराई गयी विभागीय जांच के दौरान उन्हें धोखाधड़ी करने का दोषी माना और उनकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं।

उनके विरुद्ध गुण्डाएक्ट, गैंगस्टर, रासुका के तहत कार्रवाई किए जाने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे। इसके बाद से चौहान भूमिगत हैं। कोतवाली में दर्ज तीन मुकदमो में कर्मचारी नेता ने न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ में याचिका संख्या 13248/2011 दायर कर कोतवाली में दर्ज कराई गई रिपोर्टो को निरस्त करने की मांग की थी।

यह याचिका खंडपीठ द्वारा सुनवाई के बाद खारिज कर दी तो चौहान के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर न्याय मांगा, इस पर भी इन्हें कोई राहत नहीं मिली। चौहान के अधिवक्ता अंकुर मिश्रा, अशोक पाण्डेय ने हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ में इसी मामले में एक और तीसरी याचिका संख्या 23207/2011 दायर की। याचिका में चौहान को राहत दिए जाने की मांग की गई।

हाईकोर्ट खंडपीठ के न्यायमूर्ति अमर शरन, रमेश सिन्हा की खंडपीठ में याचिका की सुनवाई की गई। चौहान के अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए तर्को को सुनने के बाद खंडपीठ ने चौहान द्वारा एक ही तथ्यों के आधार पर राहत पाने के लिए कई फोरमों में याचिकाएं दाखिल करने का दोषी ठहराया और उनकी याचिका को खारिज ही नहीं कर दिया बल्कि उन पर 10 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

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  • Web Title:छह माह से भूमिगत कर्मचारी नेता को हाईकोर्ट का झटका