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नहीं घटेगी महंगाई

मुद्रास्फीति के घटते आंकड़ों के बावजूद लोगों का मानना है कि उन्हें अगले साल भी महंगाई से छुटकारा मिलने नहीं जा रहा है। रिजर्व बैंक के एक सर्वे में शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोगों ने कम से कम यही अंदेशा जताया है। दूसरी तरफ, अर्थशास्त्रियों का यह दावा भी गलत साबित होता दिख रहा है कि वैश्विक मंदी का हमारे देश पर कोई असर नहीं पड़ेगा और हमारी-आपकी नौकरियां पूरी तरह सुरक्षित रहेंगी। कारखानों में होने वाले उत्पादन में आई कमी से घबराए उद्योग जगत ने रोजगार के अवसर कम होने की आशंका जताई है।

‘इनफ्लेशन एक्सपेक्टेशन सर्वे ऑफ हाउसहोल्ड्स सितंबर-2012’ शीर्षक से कराए गए रिजर्व बैंक के सर्वे के मुताबिक शहरी परिवारों, घरेलू महिलाओं और दैनिक मजदूरी करने वालों का मानना है कि महंगाई का डंक उन्हें अगले साल भी सताता रहेगा। सर्वे में कहा गया है कि सितंबर 2012 में मुद्रास्फीति 12.9 प्रतिशत रहेगी, जो हाल के महीनों में दस प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। लोगों को मुख्य रूप से यह डर है कि उन्हें खाद्य वस्तुओं की बढ़ी हुई कीमतों से कोई राहत नहीं मिलने वाली।

सर्वे के मुताबिक आम लोगों के लिए महंगाई का मतलब खाने-पीने की चीजों के  दाम में वृद्धि से है। फिलहाल लोगों को इसमें कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। इसीलिए सर्वे में शामिल करीब 90 प्रतिशत लोगों ने अनुमान जताया कि अगले साल भी महंगाई से जूझना होगा। रिजर्व बैंक ने इस वर्ष जुलाई-सितंबर में यह सर्व कराया था, जिसमें 12 शहरों के 4,000 शहरी परिवारों को शामिल किया गया।

एक तरफ आम लोगों को महंगाई की चिंता सता रही है तो दूसरी तरफ उद्योग जगत रोजगार के अवसरों में कमी आने की आशंका को लेकर घबराया हुआ है और उसने सरकार व रिजर्व बैंक से स्थिति को संभालने के लिए फौरन कदम उठाने का आह्वान किया है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) व उद्योग एवं वाणिज्य मंडल (फिक्की) ने निवेश में तेजी लाने के लिए रिजर्व बैंक से ब्याज दरों के मोर्चे पर नरमी लाने को कहा है तो सरकार से भी इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाने की अपील की है। औद्योगिक उत्पादन यानी कारखानों में पैदा होने वाले सामान में पिछले साल के मुकाबले छह प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। फिक्की ने जहां हालात और बिगड़ने की आशंका जताई है तो उद्योग संगठन एसोचैम ने कहा है कि अब समय आ गया है जब सरकार को इस तरफ गंभीर कदम उठाने चाहिए।

पीएचडी वाणिज्य एवं उद्योग मंडल ने कहा है कि कर्ज महंगा हो गया है। बिजली और श्रमबल की बढ़ती लाकत का औद्योगिक उत्पादन पर खराब असर पड़ रहा है।

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