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एक दर्दनाक हादसा

कोलकाता के एक अस्पताल में लगी आग ने हम पर दुखों की बरसात कर दी है। कहने की जरूरत नहीं कि यह एक बदतरीन मानवीय त्रासदी है। दक्षिण कोलकाता के तंग इलाके ढाकुरिया में बने एएमआरआई अस्पताल में 90 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें एक बांग्लादेशी शख्सभी शामिल था। अस्पताल में तड़के तीन बजे आग लगी, उस वक्त 160 मरीज गहरी नींद में थे। जिस तरह से मौका-ए-हादसा से अस्पताल प्रबंधन नदारद था और फायर ब्रिगेड को वक्त पर बुलाया नहीं जा सका, उससे ही पता चल जाता है कि प्रबंधन ने किस हद तक की लापरवाही बरती। अग्नि शमन दस्ता करीब तीन घंटे देरी से मौके पर पहुंचा और वह भी तब, जब स्थानीय पुलिस स्टेशन ने उसे इत्तला दी। आग अस्पताल के बेसमेंट में लगी। बेसमेंट को मूलत: कार पार्किग के लिए बनाया गया था, लेकिन उसका इस्तेमाल ज्वलनशील पदार्थो के गोदाम के रूप में किया जा रहा था। ऐसे में एसी के जरिये जहरीली गैस पूरी इमारत में फैली और उसने वार्ड के मरीजों को मौत की गहरी नींद सुला दी। आसपास की झुग्गियों में रहने वाले नौजवानों ने बचाव के पहले प्रयास किए। लेकिन शर्मनाक बात यह है कि अस्पताल के गार्डो ने शुरुआत में इन युवकों को खदेड़ने का काम किया। लेकिन बाद में उन्होंने खिड़की के शीशे तोड़कर मरीजों को सुरक्षित निकालने का रास्ता बनाया। जैसे कि ब्योरे हैं, चलने-फिरने में लाचार मरीजों को रस्सियों व चरखी के जरिये जिस तरह से बाहर निकाला जा रहा था, उसने उनके रिश्तेदारों को आक्रोशित कर दिया और अधिकारियों के साथ उनकी झड़पें भी हुईं। कोलकाता प्रशासन की लगातार हिदायतों के बावजूद अस्पताल ने सुरक्षा उपायों की अनदेखी की। हालांकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, लेकिन जो जिंदगियां खत्म हो गई हैं, वे लौट नहीं सकतीं। हम गमजदा परिवारों के साथ अपनी पूरी हमदर्दी जताते हैं और दुआ करते हैं कि जो लोग इस हादसे में जख्मी हुए हैं, उनके घाव जल्दी से जल्दी भर जाएं। इस हादसे से सबक लेने की जरूरत है। खासकर बांग्लादेश को, जहां आगजनी की बड़ी घटनाएं आम बात हैं।

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