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कर्ज और फर्ज

सुप्रीम कोर्ट ने कजर्दारों से कर्ज वसूलने के लिए पहलवानों और बाउंसरों की सेवाएं लेने पर बैंकों से आपत्ति जताई है। अदालत का यह रुख स्वागत के योग्य है। भारत में वसूली की प्रथा के तहत सूदखोरों और महाजनों ने भी जनता पर काफी अत्याचार किए, जो कतई भी ठीक नहीं था। लेकिन बैंकों को भी तो अपना डूबा कर्ज निकालना होता है। उनके ऊपर भी मुख्य और क्षेत्रीय कार्यालय के दबाव होते हैं। वैसे ऋण लेने के बाद उसे चुकाना भी तो लोगों का फर्ज है। अक्सर इस तरह की खबरें आती हैं कि कोई बैंक कर्मचारी कर्ज वसूली के लिए किसी के घर गया, तो कजर्दार व्यक्ति के घर के दरवाजे पर ताले लगे थे। कहीं-कहीं तो बैंककर्मी का सामना नारी शक्ति से भी हो जाता है। इसलिए हम ऋण चुकाने को अपनी जिम्मेदारी समझों, तभी तो कोई हम पर अनुचित दबाव नहीं डालेगा।

राजेंद्र कुमार सिंह
आर्य अपार्टमेंट, सेक्टर-15, रोहिणी, दिल्ली

हंसता हुआ नूरानी चेहरा
मृत्यु एक अटूट सत्य है। जो हर प्राणी की जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा है। लेकिन इससे उस व्यक्ति के योगदान घट नहीं जाते। फिल्म अभिनेता देव आनंद अब हमारे  बीच नहीं रहे। पर हमलोगों के बीच उनकी यादें हैं, जो सदैव अमरत्व बेल की तरह फैलेंगी। उनके अभिनय व निर्देशन के सब कायल हैं। मैं सातवीं में पढ़ता था, तब उनकी एक फिल्म ‘जब प्यार किसी से होता है’ प्रदर्शित हुई थी। 1962 की बात है। तब दिल्ली के ओडियन सिनेमा घर में वह आए थे। मैंने उन्हें दूर से ही देखा। एकदम हंसता हुआ नूरानी चेहरा। क्या भीड़ थी! छात्र-छात्राएं उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब हो रहे थे। उस फिल्म के गाने आज भी गुनगुनाए जाते हैं- ‘सौ साल पहले मुङो तुमसे प्यार था..’, ‘जिया हो, जिया हो, जिया कुछ बोल दो..’, ‘तेरी जुल्फों से जुदाई तो नहीं मांगी थी.. ।’  मोहम्मद रफी साहब के गाए इन गानों पर देव साहब के जबरदस्त अभिनय थे। इसके बाद तो देव आनंद के एक से एक हिट फिल्मों-गानों का दौर आया। कभी ‘काला बाजार’ का ‘खोया-खोया चांद..’, तो कभी ‘एक घर बनाऊंगा, तेरे घर के सामने..।’ निस्संदेह, उनकी ऐक्टिंग का जवाब नहीं। वह महान कलाकार थे। 
श्रीचंद भाटी
गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश


सड़क पर सावधानी
अक्सर ऐसा लगता है कि सड़क पर लाल बत्ती की अनदेखी करने में दिल्ली वाले अव्वल हैं। छोटे और बड़े वाहन चालक लाल बत्ती में भी इतनी तेज रफ्तार से चौराहे को पार करते हैं कि देखकर दिल दहल उठता है। इतना ही नहीं, चौराहों के इर्द-गिर्द दुर्घटनाएं होने का मुख्य कारण भी यही है। अत: सरकार से अनुरोध है कि सख्त ट्रैफिक नियम बनाएं। इसके अलावा हमें भी मौजूदा ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ानी होगी। दरअसल, बहुत लोग ऐसे भी हैं, जो वाहन तो चलाते हैं, पर ट्रैफिक नियमों की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।
रोशन लाल बाली
महरौली, नई दिल्ली

नशे पर रोक लगे

प्राय: शराब पीने के भयानक परिणामों की खबरें देखने और सुनने में आती रहती हैं। एक शराबी व्यक्ति जहां अपने स्वास्थ्य,जीवन और धन को बरबाद करता है, वहीं अपने परिवार को भी तबाह कर देता है। नौजवानों में बढ़ रही आपराधिक प्रवृत्ति की वजह भी यही है। शराब का नशा मनुष्य को मानव से दानव बना देता है। इसलिए शराब को छोड़ने में ही सबकी भलाई है। यह सलाह खास तौर पर उन नौजवानों के लिए है, जो ज्यादा शराब पीते हैं और अपनी जिंदगी बरबाद करते हैं।
आसिफ खान
बाबरपुर, दिल्ली

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