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बचना है तो ये सीख लो

बचना है तो ये सीख लो

किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा या फिर दुर्घटना की स्थिति में अपनी जान बचाने के लिए जरूरी है कि तुम्हें ऐसी स्थिति में खुद को बचाने के रास्ते पता हों। आज दीपक भारती तुम्हें बता रहे हैं कि स्कूल में पढ़ते हुए भूकंप आ जाने या फिर आग लग जाने पर तुम खुद को, अपने दोस्तों को या दूसरे लोगों की जान कैसे बचा सकते हो। इसे मॉक ड्रिल भी कहा जाता है।

तुम्हें पता है कि पिछले हफ्ते दिल्ली के लगभग चार हजार स्कूलों में एक मॉक ड्रिल किया गया। इसमें बच्चों को सिखाया गया कि भूकंप के दौरान वे किस तरह से अपनी सुरक्षा करें। तुमने यह तो महसूस किया ही होगा कि आजकल दुनिया के किसी न किसी हिस्से में भूकंप आते रहते हैं। ऐसे ही हमारे आसपास आग लगने जैसी दुर्घटनाएं भी अब बढ़ रही हैं। इसी शुक्रवार की सुबह ही कोलकाता के एक अस्पताल में आग लगने से कई लोगों की जानें गईं। इनसे बचने के लिए उनके बारे में जानना जरूरी है ताकि किसी मुसीबत के समय तुम खुद को बचा सको।

तुमने टीवी पर कई बार भूकंप के वीडियो देखे होंगे। इनमें घर की दीवारों में दरारें और घरों की छतें फटी हुई नजर आती हैं। हो सकता है तुम्हें याद हो, अभी कुछ दिनों पहले ही सिक्किम में तेज भूकंप आया था, जिसे टीवी पर बार-बार दिखाया गया था। इस साल मार्च में जब जापान में भयंकर भूकंप आया तो लोगों की जानकारी की वजह से वहां बहुत कम लोगों की जानें गईं। हमारे लिए जापान का सबक इसलिए उपयोगी है, क्योंकि वहां लोगों ने इस संकट के समय अपने संयम और सहयोग का जो उदाहरण पेश किया, वह अद्भुत है। भूकंप के समय हड़बड़ाने और दूसरों को डराने की बजाय अगर संयम से काम लिया जाए और खुद को बचाने के साथ दूसरों की मदद की जाए तो इस आपदा के नुकसान को कम किया जा सकता है। ऐसे संकट से निपटने के लिए हिम्मत बहुत जरूरी होती है और वह तभी आती है, जब तुम बचपन से भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं और उनके आने पर उनका मुकाबला करने, उनसे बचने के उपायों के बारे में जानते हो।

कितनी तरह की होती हैं प्राकृतिक आपदाएं:

भूकंप, बाढ़, सूखा, सुनामी, बादल फटना यानी बहुत तेज बारिश।

क्या है मॉक ड्रिल
मॉक ड्रिल किसी आपदा या दुर्घटना के समय अपनाई जाने वाली रणनीति का प्रदर्शन होता है। तुमने देखा होगा कि कई बार अखबारों में आतंकी हमले, मेट्रो में दुर्घटना, आग लगने या भूकंप आने पर की जाने वाली तैयारी को लेकर मॉक ड्रिल के बारे में छपा होता है। इससे आम आदमी को पता चलता है कि किसी इमरजेंसी या आपदा के लिए हम कितने तैयार हैं। मॉक ड्रिल वास्तविक लगती है, इसलिए अगर पहले से जानकारी न हो तो तुम्हें धोखा भी हो सकता है कि यह क्या हो रहा है। किसी भी समाज, शहर और देश के लिए समय-समय पर अपनी तैयारियों को लेकर मॉक ड्रिल करते रहना जरूरी है।

भूकंप आने पर क्या करोगे
भूकंप आने पर ऐसा महसूस होता है कि कोई हमें हिला रहा है। अगर इसकी तीव्रता कम हो तो ज्यादातर लोगों को इसका पता नहीं चलेगा, लेकिन अगर यह छह या सात तक की तीव्रता का हुआ तो सबको इसके झटके महसूस होते हैं। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एकवरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक भूकंप के दौरान ये बातें
याद रखो—

अगर तुम जमीन पर ही यानी ग्राउंड फ्लोर पर हो तो तुरंत किसी मजबूत चीज, जैसे बेड, मेज आदि के नीचे घुस जाओ।
अगर तुम बाहर, सड़क पर या बाजार में हो तो पास में मैदान या खुली जगह में पहुंच जाओ। 
ऊंची बिल्डिंगों के करीब न रहो और उनसे दूर चले जाओ।
अगर तुम कहीं अंदर फंस गए हो तो दौड़ें नहीं, इससे और तेज झटके लग सकते हैं।
पेड़ों से और बिजली के तारों से दूर रहने की कोशिश करो।

दुर्घटनाएं
प्राकृतिक आपदा की तरह किसी दुर्घटना के बारे में जानना भी जरूरी है। दुर्घटना कई तरह की हो सकती है, जैसे आग लगना, बम विस्फोट होना, घर या स्कूल में बिजली का शॉर्ट सर्किट होना आदि।

आग लगने पर क्या करोगे

तुम जहां हो, वहां आसपास अगर फायर अलार्म है तो उसे बजा दो।
हड़बड़ाने की बजाय उस जगह से निकलने की कोशिश करो, जहां आग लगी है।
विकलांग दोस्तों की मदद कर उन्हें पहले निकालने की कोशिश करो।
लिफ्ट की बजाय सीढ़ियों का इस्तेमाल करो।
इमरजेंसी और फायर (100-101) के नंबर पर आग लगने की सूचना दो।
अगर आग लगने की जगह पर फंस गए हो तो वहां की खिड़कियां और दरवाजे तुरंत खोल दो।
अगर तुम्हें या किसी को आग लग गई तो कंबल ओढ़ने की बजाय पानी डालने की कोशिश करो।

बम या कोई शक पैदा करने वाली चीज देखने पर क्या कर सकते हो-

जैसा कि तुम रेलवे स्टेशन या किसी और जगह लिखा हुआ देखते हो, कोई शक पैदा करने वाली चीज दिखे तो अपने मम्मी-पापा या किसी बड़े को बताओ, खुद उसे छूने की बिल्कुल भी कोशिश मत करो।
अगर आसपास पुलिस है तो उसे बताना भी जरूरी होता है।
रास्ते में आते-जाते आंख-कान खुले रखो। अगर कोई संदिग्ध दिखता है तो फौरन उसकी सूचना किसी बड़े को दो।

क्यों आते हैं भूकंप
हमारी धरती यानी पृथ्वी कई परतों से मिलकर बनी है। ये परतें नीचे कई फुट गहराई में एक दूसरे के ऊपर फिट हैं और लगातार घर्षण (घर्षण का मतलब धीमी गति से घिसना होता है ) करती रहती हैं। सामान्य तौर पर इस घर्षण की तीव्रता इतनी कम होती है कि यह हमें महसूस नहीं होता, लेकिन जब किसी प्राकृतिक असंतुलन की वजह से इसकी तीव्रता औसत से ज्यादा हो जाती है तो भूकंप के झटके आते हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर नापी जाती है। 5 से ऊपर तीव्रता होने पर भूकंप से ज्यादा नुकसान होने की आशंका होती है। अगर इसकी तीव्रता 4 से कम हो तो इसे सामान्य माना जाता है।

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