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देख आओ.. तुगलक का किला

दिल्ली गेट के फिरोजशाह कोटला स्टेडियम के नजदीक ही है फिरोजशाह तुगलक का किला। किले में पहुंचने वाले कितने ही लोग इसकी इमारतों में प्रार्थना करने आते हैं, क्योंकि किले के आस-पास दरगाह बनी है।

इस सुन्दर किले का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था। उन्होंने यहां 1200 बगीचे लगवाए थे। फिरोजशाह का ये किला शहर का भव्य और आलीशान किला था। तुगलक ने अपने शासन के दौरान (सन् 1351-88) इसे बनवाया था। तैमूर जैसे हमलावरों और समकालीन इतिहासकारों ने भी इस किले की खुले दिल से तारीफ की है। किले में प्रवेश करते ही सामने एक बड़ी सी दीवार है। इसके दोनों ओर से किले में प्रवेश किया जा सकता है। किले की दीवारें 15 मीटर ऊंची हैं और बाहर की ओर से  ढालू हैं। ऊंची मुंडेर अब काफी हद तक लुप्त हो चुकी है, लेकिन तीर चलाने के लिए बने छिद्रों को आज भी देखा जा सकता है।

किले में एक मृण्मय दरबार था, जो सुल्तान का दरबार था और एक छज्ज महल था, जो सुल्तान के अधिकारियों के लिए बनाया गया था। केन्द्रीय अहाता या सार्वजनिक न्यायालय महल वह जगह थी, जहां सुल्तान आम जनता के लिए दरबार लगाया करता था। इस इमारत की दूसरी मंजिल पर भी इसे मानने वाले लोग कागज पर दुआ लिखते हैं और कैन्डल जलाते हैं।

किले के चारों ओर हरियाली ही हरियाली है, जो किले की खोई हुई खूबसूरती का प्रमाण देती है कि उस वक्त ये किला कितना खूबसूरत रहा होगा। वर्तमान में मस्जिद के केवल खण्डहर ही रह गए हैं। मस्जिद के प्रवेश द्वार को नक्काशीदार पत्थरों से सजाया गया था, जिन्हें कालान्तर में लूट लिया गया। अक्सर शाम के समय लोग यहां पार्क में घूमने आते हैं। किले में एंट्री के लिए 5 रुपये प्रति व्यक्ति टिकट लगता है, 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रवेश नि:शुल्क है।

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