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दूसरी धरती है 22- बी

इस खबर ने तो तुम्हें रोमांचित कर ही दिया होगा कि एक और धरती मिल गई है। केप्लर 22-बी के बारे में तुम और अधिक जानने को उत्सुक भी होगे। तो आओ, जानते हैं धरती जैसा यह ग्रह कैसा है। सत्य सिंधु का आलेख

वहां मिट्टी भी है, पानी भी। वहां का तापमान लगभग 22 डिग्री सेंटीग्रेड है और वह हैबिटेबल जोन में भी है। हैबिटेबल जोन का मतलब होता है वहां रहने योग्य वातावरण है। उस ग्रह का नाम है ‘केप्लर 22-बी’, जिसके बारे में तुम लोगों ने पिछले दिनों टीवी चैनलों और अखबारों में पढ़ा ही होगा। वह ग्रह खबरों में इस लिए भी छाया रहा, क्योंकि वहां जीवन संभव है। आखिर हमारी पृथ्वी पर भी जीवन इन्हीं सब कारणों से तो है। इसी कारण वैज्ञानिक इसे दूसरी धरती भी मान रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि वहां कोई जीवन है या नहीं।

प्रख्यात जर्मन खगोलशास्त्री जोहानिस कैप्लर के नाम पर तैयार टेलीस्कोप कैप्लर को नासा ने 2009 में धरती जैसे ग्रहों की खोज के लिए साढ़े तीन साल के अभियान पर लगाया था। यूं तो वह अपनी आकाशगंगा में 145,000 तारों को देख सकता है, लेकिन उसने ऐसे दजर्न भर ग्रहों का पता लगा लिया है, जो हैबिटेबल जोन में स्थित है। लेकिन कैप्लर 22-बी के बारे में प्राप्त जानकारियों के आधार पर यह माना गया है कि यह पृथ्वी से काफी मिलता-जुलता ग्रह है। यह ग्रह हमारी पृथ्वी से 2.4 गुना बड़ा है। हमारी पृथ्वी से 600 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित कैप्लर 22-बी का तापमान 22 डिग्री है, जबकि हमारी धरती का औसत तापमान 15 डिग्री सेंटीग्रेड है और ईरान के रेगिस्तान में तो नासा ने 2005 में 70.7 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान पाया था। यानी कैप्लर 22-बी पर तापमान बिल्कुल सही है।

इस ग्रह का आकार तो हमसे बड़ा है, लेकिन इसके सूरज का आकार हमारे सूरज के आकार से छोटा है। इसके बीच की दूरी हमारी धरती और सूरज के बीच की दूरी से 15 प्रतिशत कम है। तुम्हारे मन में एक सवाल आया होगा कि कैप्लर और उसके सूरज के बीच की दूरी कम है तो उसका तापमान इतना अनुकूल कैसे है? अगर पृथ्वी सूरज के थोड़ा भी करीब पहुंच जाए तो धरती पर तो जीवन मुश्किल हो जाएगा। इसका जवाब यह है कि कैप्लर 22-बी के सूरज का आकार और तापमान हमारे सूरज के आकार और तापमान से कम है। अब तुम सोच रहे होगे कि वहां साल कितने दिनों का होगा। इस अभियान में यह भी पता लग चुका है। इस ग्रह पर साल 290 दिनों का होता है। उस ग्रह के बारे में और अध्ययन किया जा रहा है। चूकि वह ग्रह हमसे बहुत दूर है, इस कारण वहां इंसानों के जाने के बारे में तो फिलहाल नहीं सोचा जा रहा है, लेकिन सारी चीजें अनुकूल रहीं तो वैज्ञानिक वहां पेड़-पौधे आदि के विकास से माहौल को और अनुकूल बनाने का अभियान शुरू कर सकते हैं।

उपग्रह अंतरिक्ष में भटकते क्यों नहीं?
तुम सभी जानते होगे कि अंतरिक्ष में भेजे गए कृत्रिम उपग्रह बिना मार्ग भटके अंतरिक्ष में टिके रहते हैं। लेकिन क्या तुम्हें पता है कि वो किस तरह अंतरिक्ष में टिके रहते हैं?

उपग्रह की गति का केन्द्र भिसारी बल इसे बाहर की तरफ धकेलता रहता है। लेकिन पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल इसे दूर जाने से रोकता है। यह दोनों बल इसका संतुलन बनाए रखते हैं और उपग्रह अपनी कक्षा में ही घूमता रहता है। चूंकि अंतरिक्ष में हवा नहीं होती है, इसलिए उपग्रह पर कोई प्रतिरोधक शक्ति काम नहीं करती और यह अनंत काल तक इसी तरह घूमता रहता है। ये उपग्रह गोलाकार घूमने के बजाय दीर्घवृत्त में घूमते हैं। इन उपग्रहों का उपयोग रेडियो संकेतों को एक द्वीप से दूसरे द्वीप तक भेजने के साथ ही मौसम की जानकारी लेने के लिए भी किया जाता है। वैज्ञानिक उपग्रह अंतरिक्ष के वातावरण की जांच-पड़ताल करते हैं और सूर्य, ग्रह तथा तारों के पर्यवेक्षण का कार्य भी करते हैं। कुछ उपग्रह पृथ्वी पर स्थित खनिज भंडारों की सूचना भी देते रहते हैं।

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