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शिवमणि की उंगलियों का जादू ..और नाचा पटना

हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पटना। मशहूर ड्रमर शिवमणि की उंगिलयों का जादू रविवार को ऐसा चला कि सर्द मौसम में भी लोग झूमते-झूमते पसीने से तरबतर हो गए। शास्त्रीय और पाश्चात्य संगीत के फ्यूजन का लाइव मजा ले रहे लोगों के लिए यह एक अद्भूद पल था। कार्यक्रम के दौरान लोगों पर शिवमणि का जादू छाया रहा।

शिवमणि ने ड्रम के अलावा पानी का गैलन, सूटकेश, खंजड़ी समेत कई वाद्ययंत्रों को इस तरह बजाया कि लोग हैरान हो गए। हर धुन पर पूरा हॉल वाह-वाह की आवाज के साथ तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। हरि ओम और ओम नम: शिवाय से शुरू कर मंदिर की घंटी, चिड़ियों की चहचहाहट, रॉक, पॉप, भांगडा, नागिन धुन, आदिवासी नृत्य, बैलों की घुंघरू की आवाज, नवरात्री सांग, साइकिल की घंटी, व्हीसिल के साथ कई प्रकार की आवाजों का ऐसा अहसास कराया कि दर्शक खो से गए।

बाद में दर्शकों से लयबद्ध तरीके से तालिया बजवाईं और बच्चों से ड्रम पर जुगलबंदी भी की। उनकी प्रस्तुति खत्म होने के बाद भी काफी देर तक दर्शक वन्स मोर-वन्स मोर चिल्लाते रहे। बाद में निनाद की प्रस्तुति ‘कम बैक बुद्धा’ में कलाकारों ने बिहार के सौ वर्ष के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया और वर्तमान में भगवान बुद्ध की प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

इस नृत्य नाटिका में मुख्य रूप से अराजकता की स्थिति में हुए अवतार और वर्तमान माहौल में पृथ्वी की अपील कि हे महामानव तुम फिर आओ। दर्शाने की कोशिश की गइ थी। इसमें पृथ्वी की भूमिका निभाकर नृत्यांगना नीलम चौधरी ने खासा प्रभावित किया। नाटिका का निर्देशन कोलकाता के असीममंधु भट्टाचार्या ने किया था।

इसके बाद सितार वादक उस्ताद निशात खान और अकरम खान की जुगलबंदी ने रही सही कसर पूरी कर दी। पूरे कार्यक्रम के दौरान हॉल में संगीत की सिरता बहती रही। लोग आखिर तक अपनी कुर्सियों से चिपके रहे। इस पहले न्यायमूर्ति सह लोकायुक्त चंद्रमोहन प्रसाद ने शिवमणि को बुके देकर सम्मानित किया। मौके पर मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह, गणितज्ञ आनंद कुमार समेत कई गणमान्य लोग भी उपिस्थत थे।

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  • Web Title:शिवमणि की उंगलियों का जादू ..और नाचा पटना