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मऊ के छोटे से गांव में हो रहा ‘भारत निर्माण

मऊ सुधीर ओझा। मऊ शहर के एक मुहल्ले में अवैध असलहा बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ होने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या करघा व पावरलूम वाले इस जनपद में असलहों की खेती फल-फूल रही है। जवाब चाहें जो हो, इस जिले का एक सुनहरा पक्ष यह भी है कि यहां के छोटे से गांव कुसमौर में भारत का निर्माण हो रहा है। इस गांव में असलहों की खेती बढ़ाने की दिशा में नहीं बल्कि देश के अर्थ व्यवस्था की जान कृषि को बढ़ावा देने के लिए रोज कुछ न कुछ नया हो रहा है।

करीब 60 एकड़ क्षेत्र में स्थापित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीव ब्यूरो(एनबीएआईएम) में कार्यरत दर्जनों कृषि वैज्ञानिक दिन-रात इस प्रयास में लगे हैं कि कम होती कृषि योग्य भूमि के बावजूद देश की कृषि अर्थव्यवस्था को किस प्रकार सुदृढ़ किया जाय। इस संस्थान में एशिया का पहला जीन बैंक स्थापित है, जहां करीब चार हजार सूक्ष्मजीव संभालकर रखे गये हैं। एक शोध के मुताबिक भारत में विविध कृषि-पारिस्थितिकीय क्षेत्र हैं, जिनमें दूसरे देशों से कहीं अधिक सूक्ष्मजैविक विविधता है।

यहां कार्यरत वैज्ञानिक देश के विभिन्न हिस्सों जैसे उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, अरूणाचल प्रदेश, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, सुंदर वन क्षेत्रों से मिट्टी, पानी, वनस्पति आदि का नमूना संग्रह कर यहां लाते हैं। उनका संग्रहण कर यह शोध करते हैं कि उनका उपयोग किस प्रकार खेती की उपज बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। एनबीएआईएम के जीन बैंक में करीब चार हजार जीन उपलब्ध हैं।

इनमें दो हजार से अधिक कवक के अलावा सैकड़ाें जीवाणु आदि हैं। देश के विभिन्न प्रदेशों में कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीवों के संग्रहण व उनके पृथक्करण के लिए यहां शोध लगातार जारी हैं। इनसेट ब्यूरो के वैज्ञानिक देश के विभिन्न हिस्सों से पानी, मिट्टी आदि का नमूना लेकर आते हैं और उनका परीक्षण किया जाता है। यह पता लगाया जाता है कि भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार कौन सूक्ष्म जीव कितना कारगर है। यहां खोजी गयी तकनीकों को प्रयोगशाला से खेतों तक पहुंचाया जाता है। ब्यूरो वैज्ञानिकों के माध्यम से किसानों की सेवा कर रहा है। प्रो. दिलीप अरोड़ा, निदेशक, एनबीएआईएम इनसेटब्यूरो में एशिया का पहला जीन बैंक स्थापित है। इसमें करीब चार हजार सूक्ष्म जीव रखे गये हैं। उनकी खोज कर ली गयी है। हालांकि उनका प्रयोग होना अभी बाकी है। इस दिशा में शोध लगातार जारी है। आबादी बढ़ने के साथ ही देश में कृषि योग्य जमीन लगातार कम हो रही हैं। ऐसे में पैदावार को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसमें सूक्ष्म जीव काफी कारगर साबित होते हैं। डा. आलोक कुमार, वैज्ञानिक, एनबीएआईएम इनसेटएनबीएआईएम का उद्देश्य -कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों का अनुसंधान व संग्रहण -कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों की पहचान, गुण चिह्नंकन व प्रलेखन -कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों का उपयोग, अनुरक्षण व संरक्षण -देशी व विदेशी कृषि उपयोगी सूक्ष्मजीवों की निगरानी -सूक्ष्मजैविक विविधता और वर्गीकरण विज्ञान -मानव संसाधन विकास इनसेट ब्यूरो के बारे में कुछ बातें -राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो की स्थापना वर्ष 2001 में नवीं पंचवर्षीय योजना के तहत की गयी। -ब्यूरो के प्रवर्तक निदेशक के रूप में प्रो. दिलीप अरोड़ा ने वर्ष 2002 में कार्यभार ग्रहण किया तथा ब्यूरो ने पुराने एनबीपीजीआर भवन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नयी दिल्ली में कार्य प्रारम्भ किया। -एक जून 2004 को ब्यूरो को मऊ जिले के कुसमौर गांव में राष्ट्रीय गन्ना एवं शर्करा प्रौद्योगिकी संस्थान भवन को स्थानांतरित कर दिया गया। यह ब्यूरो भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के फसल विभाग के अंतर्गत आता है। - ब्यूरो भारत ही नहीं बल्कि एशिया भर में अपने प्रकार का अकेला संस्थान है क्योंकि इसे सूक्ष्म जैविक विविधता के संरक्षण व परिरक्षण पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए स्थापित किया गया है।

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  • Web Title:मऊ के छोटे से गांव में हो रहा ‘भारत निर्माण