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अब पानी की जांच करेंगे प्राइमरी शिक्षक

जौनपुर आनन्ददेव यादव प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों को अब गांव में पानी की भी जांच करनी होगी। अगर किसी हैंडपंप के पानी में फ्लोराइड, लौह, नाइट्रेट और आर्सेनिक जैसे सेहत के लिए हानिकारक तत्वों की अधिकता पाई गई, तो उसकी रिपोर्ट तैयार की जायेगी। शिक्षक की इस रिपोर्ट पर बीडीओ संबंधित हैंडपंप को रीबोर कराने की व्यवस्था करेंगे। शासन की इस अनूठी योजना के तहत जिले के शिक्षकों को पानी की जांच करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। ट्रेनिंग के बाद शिक्षक जांच किट लेकर गांव में जाएंगे और पानी की जांच करेंगे। ब्लाक स्तर पर तैनात मास्टर ट्रेनरों को जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया है।

यही मास्टर ट्रेनर ब्लाक स्तर पर शिक्षकों को अलग-अलग टोली में पानी की जांच के तौर-तरीके बताएंगे। ट्रेनिंग के साथ ही शिक्षकों को पानी की जांच के किट भी उपलब्ध करा दिए जाएंगे। इस किट के माध्यम से पानी में पाए जाने वाले फ्लोराइड, नाइट्रेट, लौह, क्लोराइड, अवशेष क्लोरीन, पीएच, पानी के हार्डनेस सहित आठ प्रकार के तत्वों और जीवाणुओं की जांच की जाएगी। इसके लिए उन्हें टेस्ट ट्यूब के साथ कागज से बनी अलग-अलग रंग की पट्टी उपलब्ध कराई जाएगी।

टेस्ट ट्यूब में 24 घंटे के बाद पानी के रंग का पट्टी से मिलान कर शिक्षक यह जान सकते हैं कि किस तत्व की अधिकता है। खतरे का संकेत मिला तो अध्यापक संबंधित हैंडपंप से पानी पीने वाले लोगों को उसके दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी देंगे। मसलन लौह की मात्रा अधिक होने पर चमड़ी के रोग और कैंसर तक का खतरा हो सकता है। इसकी रिपोर्ट वे ग्राम प्रधान को देने के साथ बीडीओ को देंगे।

फिर एबीएसए के माध्यम से रिपोर्ट इस योजना के नोडल अधिकारी डायट के प्राचार्य तक पहुंचेगी। ब्लाक स्तर से अगर हैंडपंप का रीबोर करा दिया गया, तो ठीक, नहीं तो डीएम और सीडीओ इस समस्या का समाधान करायेंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर शिक्षक एक प्रबुद्ध कड़ी है, इसीलिए यह जिम्मेदारी शिक्षकों को ही दी गई है। वे विद्यालय के बच्चों को भी इस बारे में जागरूक करेंगे। जांच का तरीका इतना आसान है कि बच्चों भी सीख जाएंगे। प्रदूषित जल के दुष्प्रभावों को जानकर बच्चों दूसरों को भी सचेत करेंगे।- केएन कपूर, डायट प्राचार्य

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