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अपराधियों के मोबाइल में अब इंटरनेशनल सिम

साइबर अपराधी आगरा पुलिस के लिए बड़ी मुसीबत बनते जा रहे हैं। अपराधियों के मोबाइल में इंटरनेशनल सिम कार्ड हैं। इतना ही नहीं बिना सत्यापन मिल रहे नेट कनेक्शन साइबर अपराधियों के लिए वरदान बन गए हैं। पहले पुलिस सिर्फ फर्जी आईडी पर मिलने वाले सिमकार्ड से परेशान थी। अब नेट कनेक्शन भी ऐसे ही मिल रहे हैं। साइबर सेल में स्टाफ पर्याप्त नहीं है। यही कारण हैं कि साइबर क्राइम के मामले महीनों अबूझ पहेली बने रहते हैं।


उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर 2009 को पश्चिमपुरी (सिकंदरा) निवासी रिटायर एफएसओ बृजमोहन वर्मा के 14 वर्षीय बेटे राहुल उर्फ गोलू का अपहरण हुआ था। रिहाई के एवज में दस लाख रुपये की फिरौती माँगी गई थी। पूरे जिले की पुलिस मिलकर अपहर्ताओं को नहीं खोज पाई। फिरौती के बाद ही रिहाई संभव हो सकी। फिरौती के लिए वीओआईपी (वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल की गई थी। इंटरनेट के जरिए फोन किए गए थे। शहर में वीओआईपी कॉल का यह पहला मामला था। इसके बाद देहली गेट के गजक व्यवसायी से रंगदारी माँगी गई। ताजमहल को उड़ाने की धमकी दी गई। सिर्फ एक घटना का खुलासा हुआ। गजक व्यवसायी से रंगदारी माँगने वाले कोलकाता के युवक पकड़े गए। इंटरनेट कनेक्शन उन्होंने असली आईडी पर लिया था। वह फर्जी आईडी पर होता तो उन तक पहुंचना भी संभव नहीं होता।
शहर में नेट कनेक्शन गाजर मूली की तरह बिक रहे हैं। जो चाहें किसी भी कंपनी का डेटा कार्ड ले आए। फर्जी आईडी पर नेट कनेक्शन लेकर क्राइम हुआ तो अपराधी को पकड़ना मुश्किल होगा। यह हम नहीं कह रहे साइबर सेल का यह मानना है। साइबर सेल की सबसे बड़ी चिंता आराम से मिल रहीं इंटरनेशनल सिम हैं। पिछले दिनों धोखाधड़ी का एक मामला आया था। जिसमें एक व्यक्ति को हजारों डॉलर का ईनाम निकलने की सूचना दी गई थी। फोन इंटरनेशन सिम से किया गया था। छानबीन में पता चला कि सिम फर्जी आईडी पर ली गई थी। नेट पर आराम से इंटरनेशनल सिम उपलब्ध हैं। ऑन लाइन पेमेंट करके सिम कार्ड किसी भी पते पर मंगाया जा सकता है। हाईटेक अपराधी अब ऐसा कर रहे हैं।

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क्या है वीओआईपी
आगरा। यह ऐसी कॉल होती है जिसमें फोन करने वाले के सिम की पहचान छिप जाती है। इंटरनेट के जरिए फोन किया जाता है। कई साइट हैं जो वीओआईपी कॉल कराती हैं। उन पर पहले ईमेल आईडी बनानी होती है।
जाहिर है अपराधी फर्जी आईडी बनाएगा। कंप्यूटर में मॉडल लगाया जाता है। सिम लगती है। उसके बाद हैड फोन के जरिए बात की जाती है। जिस सिम कार्ड का प्रयोग किया जाता है उसका नंबर फोन सुनने वाले के पास नहीं पहुंचता है। कॉल सर्वर के जरिए पहुंचती है। कॉल को जो गेट वे ओपन मिलता है उसके जरिए पहुंचती है। ऐसी स्थिति में फोन आने पर उस सर्वर का नंबर आता है जिसके जरिए कॉल पहुंचती है। इसलिए ऐसी कॉल आने पर विदेशी नंबर आते हैं। कॉल किसने की है यह पता लगाने के लिए बहुत लंबी प्रक्रिया होती है। इसलिए वीओआईपी कॉल के कई मामले साइबर सेल में जाँच की प्रक्रिया में हैं। अभी तक उन मामलों में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है।
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बिना सत्यापन नहीं मिलें कनेक्शन
आगरा। साइबर अपराध में पुलिस की मदद करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सत्यापन नेट कनेक्शन नहीं मिलने चाहिए। फिलहाल ऐसा कोई नियम तो नहीं है। अपराधियों के शातिराना अंदाज देख नियम बनाने पड़ेंगे। वर्तमान में नेट कनेक्शन बड़े आराम से मिलता है। चंद मिनट में नेट चालू हो जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।

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