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अन्ना के साथ लेफ्ट-राइट

मजबूत लोकपाल विधेयक को लेकर आंदोलनरत समाजसेवी अन्ना हजारे को जनता के साथ अब राजनीतिक ताकत भी मिल गई है। रविवार को जंतर-मंतर पर एक दिनी अनशन के दौरान लोकपाल पर महाबहस में अन्ना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उनके जन लोकपाल को एनडीए, वामदलों के साथ बीजद और तेदेपा ने भी समर्थन दिया। इस जोरदार समर्थन से संसद के भीतर अन्ना के जन लोकपाल की मांग को मजबूती मिलेगी।

महाबहस में शामिल होने वाले आठ दलों के नेताओं ने एक सुर में कहा कि अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाने के लिए 27 अगस्त को संसद ने जो भावना व्यक्त की थी, उसके अनुरूप ही लोकपाल कानून बनना चाहिए। संसद द्वारा व्यक्त भावना में कोई कॉमा और फुलस्टॉप नहीं लगेगा।

इतना ही नहीं, सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी भी काफी हद तक अन्ना के साथ खड़ी दिख रही है। इन दलों के लोकसभा में 200 से भी ज्यादा सांसद हैं, इसलिए हजारे के लिए इतना बड़ा राजनीतिक समर्थन सरकार को उनकी मांगों को मानने के लिए दबाव बनाने में कारगर साबित होगा।

एनडीए और लेफ्ट के रुख से बुधवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक के नतीजों और संसद में आने वाले दिनों में लोकपाल विधेयक पर छिड़ने वाली बहस की तस्वीर भी साफ हो गई है। यह पहला मौका है जब अन्ना हजारे ने राजनीतिक दलों को साथ लेकर चलने के संकेत दिए हैं। हजारे ने मजबूत लोकपाल के लिए वहां मौजूद राजनीतिक दलों से आंदोलन छेड़ने की अपील की है।

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