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मोबाइल इंटरनेट सुरक्षा की जरूरत

आपका प्यारा मोबाइल फोन अब बात करने भर का आला न रहकर उच्च दर्जे का कंप्यूटर तक बन चुका है। भारत में मोबाइल फोन पर इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों की तादाद में तेजी से इजाफा हो रहा है। वेबसाइट्स और एप्लीकेशन बनाने वाली कंपनियां भी अपना मोबाइल वर्जन तैयार कर रही हैं, लेकिन मोबाइल पर बढ़ते इंटरनेट के इस इस्तेमाल के साथ कई खतरे भी दस्तक दे रहे हैं।

सोफोस के टेक्नोलॉजी स्ट्रेटिजी के निदेशक जेम्स लियन के मुताबिक, मोबाइल फोन और अगली पीढ़ी के इंटरनेट ब्राउजर्स 2012 में साइबर अपराधियों के अगले निशाने पर होंगे। उन्होंने बताया कि इंटरनेट की मदद से ही आपको निशाना बनाया जा सकता है। नेट पर सर्च करने जाइए तो फिशिंग की तमाम जानकारियां मिल जाती हैं। इसके साथ ही ऐसे कई टूल्स भी मिल जाते हैं, जो किसी भी सिक्योरिटी को तोड़ने का दावा करते हैं। उन्होंने बताया कि मोबाइल पर खतरा तो 1990 के दशक से मंडरा रहा है, लेकिन 2011 में इसके प्रति लोगों का नजरिया बदला है।

कंप्यूटर के लिए सुरक्षा सॉफ्टवेयर (नॉर्टन एंटीवायरस) बनाने वाली कंपनी सिमेंटेक ने इस वर्ष जून में अपने एक सर्वेक्षण में बताया था कि हैकर्स फिशिंग वेबसाइट्स के जरिए मोबाइल फोन्स को निशाना बना रहे हैं। इन दिनों जहां मोबाइल के माध्यम से भुगतान का चलन बढ़ रहा है तो ऐसे में फिशिंग बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। सिमेंटेक के मुताबिक, 2010 में मोबाइल पर फिशिंग के हमले में 42 फीसदी का इजाफा देखा गया। इसके साथ मोबाइल फोन हैकिंग भी बड़ा खतरा है, जिसके लिए ब्लूटूथ का भी इस्तेमाल किया जाता है।

एक अनुमान के अनुसार, भारत में अक्तूबर 2011 तक 87 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन उपयोक्ता हैं और इनकी तादाद लगातार बढ़ रही है। मैकिंसे ने अपनी एक रिपोर्ट में अंदाजा लगाया है कि 2015 तक देश के तीन चौथाई मोबाइल उपभोक्ता फोन पर इंटरनेट इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे, यानी खतरे में और इजाफा हो सकता है।

फिशिंग वेबसाइट्स: ये हमारी जानी-पहचानी वेबसाइटों जैसी दिखती हैं और हम लापरवाही से उस पर अपनी गोपनीय सूचनाएं डाल देते हैं। फिशिंग वेबसाइट हमारी इंटरनेट पहचान, पासवर्ड जैसी गोपनीय सूचनाएं चुरा लेती हैं, जो हमारे लिए नुकसानदेय साबित हो सकता है।

अब सिर्फ एक एसएमएस से ही खरीदारी, बिलों का भुगतान और मनी ट्रांसफर हो सकता है। ऐसे में अगर मोबाइल फोन चोरी हो जाए तो बेहद गंभीर परिणाम हो सकते हैं। मोबाइल पर फिशिंग और मालवेयर जैसे अन्य बड़े खतरे भी हैं। ग्राहक भरोसे के साथ मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकें, इसके लिए उपभोक्ता, कंपनी के उपकरण और नेटवर्क, सभी स्तर पर सुरक्षा को कड़ा किए जाने की जरूरत है।

सुरक्षा टिप्स
अपने फोन के बारे में सभी जानकारियां
जैसे सिम नंबर, आईएमईआई नंबर और मॉडल लिखकर रखें। अगर फोन खो जाए तो इन जानकारियों से पुलिस को काफी मदद मिलेगी। फोन चोरी होने पर फौरन सेवा प्रदाता कंपनी को सर्विस बंद करने को कहें।
फोन को पिन से लॉक करके रखें, लेकिन इसका एक नुकसान भी है। मान
लीजिए आपका फोन किसी को मिलता है और वो आपको लौटाना चाहता है,
लेकिन फोन बंद होने की वजह से फोन खोल ही नहीं पाएगा, तो इसके लिए जरूरी है आपकी ईमेल आईडी और कोई जरूरी फोन नंबर, जो फोन लॉक होने के बावजूद देखा जा सके।
ब्लूटूथ की जरूरत न होने पर उसे बंद रखें।
एंटी वायरस और एंटी थेफ्ट सॉफ्टवेयर लोड करके रखें।
भा. म.

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