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युवा आबादी की जरूरतों पर फैसले का समय

ऐसा अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत की आबादी चीन से अधिक हो जाएगी। भारत के पक्ष में कहा जाता है कि यहां पर युवाओं की संख्या अधिक है। भारत में 70 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या ऐसे युवाओं की है, जिनकी उम्र 35 वर्ष से कम है। आगे आने वाले दिनों में आबादी के 50 प्रतिशत से अधिक लोगों की औसत आयु 28 वर्ष हो जाएगी, जबकि चीन के लोगों की औसत आयु 37 वर्ष, अमेरिकी जनता की 38 वर्ष, पश्चिमी यूरोप के लोगों की 45 वर्ष और जापानियों की औसत आयु 49 वर्ष हो जाएगी।

भारत की जनसंख्या 2030 तक इतनी अधिक हो जाएगी कि पूरे संसार की जनसंख्या का वह 20 प्रतिशत होगी। जबकि भारत का क्षेत्रफल पूरी दुनिया के क्षेत्रफल की तुलना में केवल तीन प्रतिशत है। तेजी से बढ़ती इस आबादी का दबाव प्राकृतिक संसाधनों पर  काफी पड़ेगा। खासकर तब, जब अब भी भारत की कृषि मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर है और सिंचाई के साधन अब भी अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं। आए दिन देश का कोई न कोई भाग बाढ़ और सूखे से प्रभावित हो ही जाता है।

आबादी में युवाओं की संख्या अधिक होने से यह लाभ अवश्य है कि काम करने वाले लोगों की संख्या बहुतायत में होगी। लेकिन क्या इन युवकों को संतोषजनक रोजगार के अवसर मिल पाएंगे? विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि भारत के हिंदी भाषी राज्यों में शिक्षा का संतोषजनक विकास नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में जितने प्राथमिक स्कूल हैं, वहां साल में आठ-नौ महीनों तक कोई पढ़ाई ही नहीं होती है। वहां न तो स्कूल की इमारतें हैं और न शिक्षक नियमित रूप से आते हैं। ऐसे स्कूलों में पढ़ने वाले शायद कुशल मजदूर भी नहीं बन सकेंगे।

पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि रोजगार की खोज में भारत के अधिकतर गांवों से बड़ी संख्या में लोग शहरों की ओर भागने लगे हैं। एक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2001 में शहरों की आबादी 27 प्रतिशत थी। आज वह 31 प्रतिशत से अधिक है। इसका असर शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पड़ रहा है। शहरों में झुग्गी-झोपड़ियां तेजी से बढ़ रही हैं।

यदि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तथा स्वास्थ्य की अच्छी सुविधा लोगों को मुहैया नहीं कराई गई तथा गांव और शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास नहीं किया गया, लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान नहीं किए गए, तो युवाओं की बढ़ती संख्या खुशहाली के बदले सिरदर्द पैदा कर सकती है। इसलिए जरूरी है कि एक तरफ तो बढ़ती हुई आबादी की रफ्तार पर लगाम लगाई जाए और दूसरी तरफ युवा वर्ग को रोजगार के लिए तैयार किया जाए और इसके अवसर उपलब्ध कराए जाएं। युवा वर्ग को देश की उत्पादक फौज बनाकर ही हम विकास कर सकते हैं।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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