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शिखर पर सहवाग-सचिन

पहले मैं अक्सर यह सोचता था कि सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को कौन तोड़ सकता है? दरअसल, सचिन की निरंतर ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से कोई भी खिलाड़ी उनके रिकॉर्डो के आसपास भी नहीं फटक पाता था। मास्टर ब्लास्टर ने जब वनडे मैच में नाबाद दो सौ रन जड़े थे, तो उस वक्त यही लगा था कि कोई भी खिलाड़ी इसे नहीं छू पाएगा। लेकिन एक साल और दस महीने के अंदर ही सचिन के इस रिकॉर्ड को नजफगढ़ के नवाब वीरेंद्र सहवाग ने तोड़ दिया। इससे लगने लगा है कि सचिन की तरह ही सहवाग भी कीर्तिमानों के शिखर पर पहुंचेंगे। वाकई, उनके बल्ले में वे स्ट्रोक हैं, उनकी कलाई और कंधों में वह क्षमता है, जिनके बूते वह क्रिकेट के नए कीर्तिमान रच सकते हैं। अब जबकि सहवाग ने सचिन के इस रिकॉर्ड को तोड़ दिया है, तो सवाल उठने लगे हैं कि सहवाग के रिकॉर्ड को कौन तोड़ेगा? यह इतना आसान काम नहीं है। फिलहाल किसी खिलाड़ी में इतनी क्षमता नहीं दिख रही है। सिवाय दो खिलाड़ियों के। एक सचिन व दूसरा खुद सहवाग। सचिन अगर फिट रहे, तो कुछ हद तक मुमकिन है कि वह फिर वनडे मैच में दो सौ को पार करें। वहीं अगर दिन सहवाग का रहा, तो यह कारनामा फिर हो सकता है।
संजय उपाध्याय, वसुंधरा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश

बेरोजगारों से मजाक
उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे नौजवानों के साथ क्रूर मजाक जारी है। अब तो बीएड के डिग्री धारक बेरोजगारी के अभ्यस्त हो चुके हैं। वैसे यह हाल किसी एक क्षेत्र का नहीं है। सभी क्षेत्रों में सरकारी अदूरदर्शिता, अनुभवहीनता व कुव्यवस्था का बोलबाला है। कई परीक्षाओं की सूचनाएं व तारीखें लगातार बदल रही हैं। इससे अनिश्चितता का माहौल है। इसे उत्तर प्रदेश सरकार की अपरिपक्वता नहीं तो और क्या कहेंगे? दरअसल, सरकार अपनी अक्षमताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है। सरकार चुनाव से पहले का अपना वक्त गुजार रही है और इसकी कीमत युवा बेरोजगार चुका रहे हैं।
ओम प्रकाश, रामपुर उदयभान, बलिया

सड़क की बदहाली
अगर किसी को नरक की यात्रा का जायजा लेना हो, तो वह दिल्ली के द्वारका में दादा देव मंदिर मार्ग पर चलकर ऐसा अनुभव कर सकता है। बरसात का मौसम हो न हो, इस सड़क पर पानी जमा रहता है। सड़क पर इतने गड्ढ़े हैं कि कोई भी कहीं भी लुढ़क जाए। रिक्शा चालकों की क्या हालत होती है, इसका अनुमान तभी लग सकता है, जब आप यहां आकर रिक्शा पर बैठेंगे। दिल्ली के शासकों से इतना ही कहा जा सकता है कि वे एक बार इधर आएं, तो शायद उन्हें हमारी पीड़ा का अहसास होगा।
सुरेंद्र लखेड़ा, सिद्धार्थ कुंज, द्वारका, नई दिल्ली

टीम अन्ना पर सवाल 
जिस जाल में टीम अन्ना ने सरकार को फंसाने का प्रयास किया था, अब उसी जाल में वह खुद फंसती जा रही है। किरण बेदी को टीम अन्ना की सहयोगी के अलावा एक ईमानदार आईपीएस अधिकारी के तौर पर भी जाना जाता है। लेकिन समाज सुधारक बनने की राह में ही वह विवादों से घिर गईं। यह नौबत आ पहुंची है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हो गए हैं। मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किरण पर धोखाधड़ी का केस उनकी छवि पर किसी बदनुमा दाग से कम नहीं है। हालांकि वह हिम्मत तो दिखा रही हैं, लेकिन इससे उन पर लगे आरोप धुल नहीं जाते हैं। टीम अन्ना इस मामले पर सफाई दे और किरण बेदी अब कानून का सामना करें।
आजम खान, भरत नगर, नई दिल्ली

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