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हरिद्वार के विकास हेतु महायोजना लागू

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखने वाली विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी हरिद्वार के सुनियोजित विकास के लिए काफी समय से लंबित शहर की महायोजना को उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आनन फानन में लागू कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार मास्टर प्लान लागू करने के बाद अब दर्जनों अवैध कालोनियों को शमन शुल्क वसूल करके नियमित किया जा सकेगा। कुंभ मेले को देखते हुए मेला क्षेत्र का भी विकास किया जाएगा। मास्टर प्लान को केन्द्र सरकार के अन्तर्गत अरबन डेवलपमेंट प्लानिंग फाइनेंशियल एवं इम्पलीमेंटेशन (यूडीपीएफआई) की गाईड लाईन के अनुसार संशोधित करके तैयार किया गया हैं।
 
हरिद्वार विकास प्राधिकरण के प्रभारी सचिव अनिल कुमार त्यागी ने बताया कि मास्टर प्लान के अनुसार हरिद्वार में आश्रमों के लिए 3809.81 हेक्टेयर भूमि को आरक्षित किया गया है। इसी प्रकार हरिद्वार दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्राधिकरण के अन्तर्गत आने वाले लगभग पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग को व्यवसायिक घोषित किया गया हैं। इसके लिए लगभग 274 हेक्टेयर भूमि आरक्षित की गई हैं।

उन्होने बताया कि सार्वजनिक सुविधओं के लिए 842.46 तथा खेल एवं मनोंरंजन पार्क के लिए भी भूमि का प्रस्ताव रखा गया हैं। इसी प्रकार यातायात, परिवहन एवं हरित क्षेत्र का भी प्रस्ताव नई महायोजना में रखा गया हैं।

उन्होंन बताया कि महायोजना के अनुसार कुंभ मेले और हरिद्वार में लगने वाले मेलों को ध्यान में रखकर विशेष पर्यटन तथा मेला क्षेत्र के अन्तर्गत 898.42 हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया हैं जो केन्द्र सरकार के मार्गदर्शन और यूडीपीएफआई के मानको के अनुरूप संशोधित एवं स्वीकृत किया गया गया हैं।

सूत्रों के अनुसार इस योजना के तहत कुल 20119 हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है भविष्य में लोगों की आवसीय आवश्यक्ताओं को देखते हुए हरिद्वार नगरपालिका क्षेत्र से सटे आस पास के क्षेत्रों को भी हरिद्वार विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल करके वहां पर नियोजित विकास का खाका तैयार किया गया हैं।
 
सूत्रों के अनुसार हरिद्वार में पुराने मास्टर प्लान में संशोधन की प्रक्रिया कई सालों से चल रही थी। किसी न किसी कारण से महायोजना लटक जाती थी। परिणामस्वरूप अनियोजित विकास के चलते हरिद्वार और आस पास के क्षेत्रों में दर्जनों अवैध कोलोनियां बन गई हैं।

मामला न्यायलायों में मामला पहुंचने के बाद उत्तराखण्ड सरकार पर इस योजना को लागू करने का दबाव बढ़ गया था। जिसके कारण सरकार को इस मामले में निर्णय करना पडा। महायोजना लागू होने के बाद अवैध निर्माणों पर रोक लगेगी और अवैध कालोनियों एवं निर्माणों को नियमित करने से हरिद्वार विकास प्राधिकरण को करोडों रूपए की आय भी होगी।

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  • Web Title:हरिद्वार के विकास हेतु महायोजना लागू