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पलक झपकते मनचाहा काम

अगर आपको खाना नहीं बनाना आता या पत्नी बच्चों को ठीक से न संभाल पाने के लिए रोज झाड़ पिलाती है या मैथ्स की मार की वजह से प्लेन उड़ाने का सपना, सपना ही रह गया हो तो अब चिंता की कोई बात नहीं है।

बोस्टन यूनिवर्सिर्टी और एटीआर कंप्यूट्यूशनल न्यूरोसाइंस लैबोरेट्री के वैज्ञानिक जल्द ही एक ऐसी तकनीक बना लेंगे, जिसकी मदद से कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर डालने की तरह इनसान के दिमाग में नई-नई कलाओं को अपलोड किया जा सकेगा।

शोध में लगे वैज्ञानिकों का यहां तक दावा है कि अब दूसरे देश में जाने पर व्यक्ति को किसी ट्रांसलेटर की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि यात्रा से दस मिनट पहले उस क्षेत्र की भाषा को अपने दिमाग में अपलोड किया जा सकेगा।
शोधकर्ताओं ने बताया कि वे फंक्शनल मैग्नेटिक रेजोनेंस मशीन (एफएमआरआई) का अध्ययन कर रहे हैं। उनका इरादा ज्ञान को किसी के विज्युअल कार्टेक्स में संकेतों की मदद से भेजने का है, ताकि दिमाग के क्रियाकलापों को बदला जा सके। इस प्रक्रिया को उन्होंने डिकोडड न्यूरोफीडबैक या डेक्नेफ नाम दिया है।

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