DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

मानवाधिकार के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं : मुख्य न्यायाधीश

पटना, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। पटना हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रेखा एम. दोशित ने कहा कि मानवाधिकार के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की जरुरत है। बिना आम लोगों में जागरुकता लाए मानवाधिकार का संरक्षण नहीं किया जा सकता है। मानवाधिकार संरक्षण के लिए जन-जन तक जाने की जरुरत है ताकि लोग जान सकें कि उनका अधिकार क्या है।

शनिवार को पाटलिपुत्र अशोक होटल में बिहार मानवाधिकार आयोग के तत्वावधान में आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण के लिए हमें अपनी सोच में भी बदलाव लाना चाहिए ताकि अन्य लोग भी सम्मानित जीवन जी सकें।

जीवन की गुणवत्ता को सुधारने की आवश्यकता है। सम्मानित जीवन जीने के लिए शिक्षा जरूरी है। शिक्षा के बिना अपने अधिकार को सही ढंग से नहीं जान सकेंगे। जब लोग शिक्षित होंगे तब अपने अधिकार के प्रति सजग भी होंगे। समाज के प्रबुद्ध जन मानवाधिकार संरक्षण की जानकारी निचले तबके तक पहुंचाए।

उन्होंने कहा कि यह युग ज्ञान आधारित है। जमाना ज्ञान के पीछे भाग रहा है। देश में विकास भी हो रहा है लेकिन मानवाधिकार हनन की शिकायतें भी आ रही हैं। अमीर व गरीब के बीच खाई बढ़ती जा रही है। मानवाधिकार की रक्षा कर विकास का रास्ता निकालना चाहिए। यह बहुत ही अफसोस की बात है कि मानवाधिकार संरक्षण के लिए देश में आयोग बनाना पड़ा।

मानवाधिकार आयोग के सदस्य जस्टिस राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि मानवाधिकार जीवन की ऊर्जा है। नैतिक मूल्यों व सांस्कृतिक मूल्यों को समझने की जरुरत है। सरकारी विभाग में कई पद वर्षो से रिक्त पड़े हैं जिससे लोगों को मौलिक सुविधाएं भी नहीं मिल रही है।

उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति, समाज सरकार के चारों अंग यानी विधायिका, कार्यपालिका, न्यायापालिका व मीडिया की सोच में बदलाव नहीं होगा तब तक मानवाधिकार का संरक्षण नहीं होगा। आयोग के सदस्य व पूर्व डीजीपी नीलमणि ने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण के लिए आम लोगों के साथ-साथ सरकारी सेवकों को भी प्रशिक्षित करने की जरुरत है।

आयोग की अनुशंसा को राज्य सरकार लागू कर रही है। मानवाधिकार विषय को स्कूली शिक्षा में भी शामिल किया जाना चाहिए। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए आयोग के सचिव आर. के. खंडेलवाल ने आयोग के क्रियाकलापों की विस्तृत रूप से चर्चा की।

समारोह में आयोग के एसपी विनोद कुमार, उप सचिव शैलेश कुमार सहित पटना हाईकोर्ट के कई न्यायाधीश व अभिवक्तागण शामिल थे। दूसरी तरफ मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के आयोजन में जस्टिस राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि धड़ाघड़ हो रही पेड़ों की कटाई और मकानों के निर्माण से हर तरफ कंक्रीट का जंगल दिखाई देने लगा है, ऐसे ही हर 10 दिन पर बनने वाले कानूनों से कानून का जंगल बन गया है।

युवाओं में मानवाधिकारों के प्रति रूझान पर उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वतंत्र रूप से सोचना चाहिए। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा, प्रो एनके चौधरी भी मौजूद थे। सरकार व नक्सली के बीच मध्यस्थता को तैयार: जस्टिस झा पटना।

राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस एस. एन. झा ने कहा कि राज्य ही नहीं पूरे देश में नक्सलवाद एक गंभीर समस्या है लेकिन हिंसा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए बातचीत का रास्ता ही अपनाना होगा। सरकार व नक्सली अगर बातचीत करने को तैयार हों तो वे निजी तौर पर मध्यस्थता करने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा कि आयोग में कम संसाधन होते हुए भी काफी अधिक काम हुए हैं। वर्तमान समय में मानवाधिकार का क्षेत्र बड़ा ही व्यापक है। दुनिया में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जो मानवाधिकार के दायरे न आता हो। विकास के साथ-साथ मानवाधिकार संरक्षण की ही गारंटी होनी चाहिए तभी एक सम्मानित व सभ्य समाज का निर्माण हो सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:मानवाधिकार के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं : मुख्य न्यायाधीश