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राजा अंदर तो चिदम्बरम बाहर क्यों?

 वरिष्ठ संवाददाता गोरखपुर। जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले के लिए पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा और केन्द्रीय मंत्री पी.चिदम्बरम को बराबर का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राजा जेल के अंदर हैं तो चिदम्बरम बाहर क्यों हैं? इस मसले पर उन्होंने शनिवार को दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के प्रेस कांफ्रेन्स में रखे गए तथ्यों को गलत ठहराया। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि सिब्बल को अब कोर्ट में ही दलील पेश करनी चाहिए। शहर में एक कार्यक्रम में आए स्वामी शनिवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ भी थे।

टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में चिदम्बरम की संलिप्तता के पर्याप्त सबूतों के संकलन का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि 17 दिसम्बर को वह ये सारे सबूत कोर्ट में पेश करेंगे। उन्होंने कहा कि सिब्बल का यह कहना कि राजा और चिदम्बरम 10 जनवरी 2005 के पहले कभी नहीं मिले, गलत है। सच यह है कि टूजी स्पेक्ट्रम सौदे का मसौदा काफी पहले तैयार हो चुका था। 10 जनवरी 2005 को इस मसौदे पर दस्तखत भर किए गए। 2003 में ही इस तरह के सौदे के लिए वित्त और दूरसंचार मंत्री को अधिकृत किया गया था। यदि राजा ने बिना पूछे सौदा किया तो चिदम्बरम ने कार्रवाई क्यों नहीं की? इस मामले में दोनों बराबर के दोषी हैं। कोर्ट में ट्रायल के दौरान वह सारे सबूत सामने रखेंगे। 

स्वामी ने कहा कि टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले में कार्रवाई के लिए नए कानून का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा कानूनों के जरिए ही दोषियों को सजा मिल सकती है। संसद में चिदम्बरम को न बोलने देने के भाजपा के स्टैण्ड को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि यदि देश का गृहमंत्री ही संदेह के घेरे में हो तो उसे संसद में नहीं बोलने देना बिल्कुल सही है। टूजी स्पेक्ट्रम घोटाले से देश को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। ट्राई ने स्पेक्ट्रम का दाम- इंट्री फीस, लाइसेंस फीस और रायल्टी।

कुल तीन हिस्सों में तय किया था, लेकिन यहां इंट्री फीस पर ही लाइसेंस दिया गया। सुब्रह्मण्यम के बोल- भीष्म पितामह की तरह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ‘चीरहरण’ (टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला) देखते रहे- साम्प्रदायिक हिंसा विरोधी बिल लाकर यूपीए अध्यक्ष ने देश को बांटने की कोशिश की है। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए क्राइम ब्रांच को तहरीर भेजी थी। एफआईआर दर्ज नहीं हुई। अब कोर्ट में जाऊंगा-हावर्ड यूनिवर्सिटी में मेरे लेख का विरोध मेरे इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के लोगों ने नहीं, बल्कि उन लोगों ने किया जो हिन्दू धर्म के बारे में अनाप-शनाप बातें लिखते रहते हैं-यूनिवर्सिटी ने मेरा लेख सोनिया गांधी के दबाव में हटाया- अयोध्या में राममंदिर था यह तय हो चुका है। मुसलमानों को भाईचारे की खातिर कहीं और जमीन लेकर वह जगह मंदिर के लिए छोड़ देनी चाहिए- चिदम्बरम टूजी स्पेक्ट्रम में कोर्ट के सामने गए तो उनके खिलाफ 17 और मामले निकलेंगे- अन्ना की मांग सही है। मजबूत लोकपाल कानून लागू होना ही चाहिए

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