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औरत की निष्पक्ष दास्तान

प्रस्तुत उपन्यास समाज के मध्य और निम्न तबके का सच अपने तरीके से बयान करने की कोशिश करता है। कथानक में कथानायिका के भीतर उसके घरेलू हालात के कारण धीरे-धीरे उपजते विद्रोह का सविस्तार ब्योरा खासा रोचक है। खास बात यह है कि कथा में लेखक ने संवादों में किसी किस्म का परहेज नहीं किया है। उनकी यही साफगोई समूची कथा को आज की संवेदनहीनता और उसके शिकार हो रहे लोगों के निष्पक्ष दस्तावेज के तौर पर दिखाती है। औरत के अधिकार आज भी कितने असली हैं और कितने कागज़ी, इस पर बेलाग बहस उपन्यास में है। कहानी निष्कर्ष देती है कि प्रेमाकांक्षा एक नैसर्गिक क्रिया है, जो हर इनसान में होती है, जिसके बिना जीवन अर्थहीन है। फिर भी शेष, लेखक: राजकमल, प्रकाशक: भावना प्रकाशन, पटपड़गंज, दिल्ली-91, मूल्य: 350 रु.

सफर के नाम
वरिष्ठ कवि विष्णु चंद्र शर्मा के इस नए कविता संग्रह में उनके अमेरिका और यूरोप प्रवास के दौरान लिखी गई कविताएं संकलित हैं। कविताओं में उन्होंने वैश्वीकृत समय में विकसित पश्चिमी समाज की सोच की परतें कुरेदने के साथ यह जानने का प्रयास किया है कि आज के कथित मुक्त समाज में ‘व्यक्ति’ कहां है और  उसकी इनसानी पहचान कितनी बाकी है! सफर के दौरान कवि अनेक दर्शनीय स्थलों की हलचल और वहां के मौजूदा ऐतिहासिक महत्व को भी खंगालता है। वह अपने भीतर चल रही उठा-पटक को तेज रफ्तार पश्चिमी समाज के समकक्ष रख कर तौलता है। पूर्वी और पश्चिमी जगत के बीच सेतु का काम करती हैं कविताएं। मेरा एक बिंब बचा है, कवि: विष्णु चंद्र शर्मा, प्रकाशक: लोक प्रकाशन गृह, सादतपुर, दिल्ली-95, मूल्य: 150 रु.

देश के प्रधानमंत्री
प्रस्तुत पुस्तक में पंडित जवाहरलाल नेहरू से डॉ. मनमोहन सिंह तक देश के सभी प्रधानमंत्रियों के बारे में जानकारी दी गई है। सीधी-सरल भाषा में लिखी गई यह पुस्तक विद्यार्थियों से लेकर बड़ों तक के लिए है। इसमें देश की शीर्ष सरकारी गद्दी पर बैठ चुके नेताओं के छुटपन, शिक्षा, जीवन संघर्षो, राजनीतिक यात्रा, उनके द्वारा लिए गए बड़े फैसलों, उनके राजकाज के दौरान देश पर आए कठिन समय और उनके समूचे शासनकाल के बारे में भी जानकारी दी गई है, जो छात्रों के काम आएगी। लेखिका ने कम शब्दों में बड़ी घटनाओं की जानकारियों को पिरोने का प्रयास किया है, जो बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ाता है। जवाहरलाल नेहरू से मनमोहन सिंह तक, लेखिका: चित्र गर्ग, प्रकाशक:पीताम्बर पब्लिशिंग कंपनी, नई दिल्ली-5, मूल्य:175 रु.

जीवन जीने के सूत्र
दौड़भाग भरे जीवन में तनाव मुक्ति भरे क्षण बहुत दुर्लभ तत्व बनते जा रहे हैं। पुस्तक में ओशो के प्रवचनों के आधार पर तैयार किए गए सूत्र हैं, जो बताते हैं कि किस तरह जीवन की आपाधापी में से फुर्सत और मस्ती के पल निकाले जा सकते हैं। पुस्तक में लेखक ने ओशो रजनीश के ध्यान, तनाव, विश्रम और ऊब से उबरने के अनेक सूत्र छोटी-छोटी रोचक कहानियों की मार्फत दिए हैं। लेखक स्वयं ओशोवादी रहे हैं और उनके आश्रम में रह कर उन्होंने ओशो के प्रवचनों को कंठस्थ किया और सीधी-सरल भाषा में यहां आमजन के लिए पेश किया है। इसके बावजूद तनाव मुक्त रहने का अभ्यास व्यक्ति को अपने स्तर पर ही करना होता है। तनाव मुक्त कैसे जिएं, लेखक: स्वामी आनंद सत्यार्थी, प्रकाशक: डायमंड बुक्स, नई दिल्ली-20, मूल्य:100 रु.
संदीप जोशी

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