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जिला अदालतों में चेक बाउंस के मामले सबसे ज्यादा

दिल्ली की जिला अदालतों में चेक बाउंस के सबसे ज्यादा मामले लंबित हैं। जिसकी वजह से अदालतों में मुकदमो का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए शनिवार को आयोजित लोक अदालत में चेक बाउंस के मामलों में सुनवाई को प्राथमिकता दी गई। हालांकि कड़कड़डूमा अदालत में बिजली चोरी के मामलों के लिए मेगा लोक अदालत लगाई थी। लेकिन अन्य अदालतों क्रमश: पटियाला हाउस, तीस हजारी, रोहिणी, द्वारका और साकेत में चेक बाउंस के मुकदमों का अधिक निपटारा हुआ।


चेक बाउंस के ढाई हजार के मामले निपटाए गए। इन मामलों वादी और प्रतिवादी को आमने-सामने खड़ाकर जुर्माना रकम तय करने की जिम्मेदारी भी आपसी सुलह से दोनों पक्षों को दी गई। ताकि विवाद को समझौते से खत्म कराया जा सके। सबसे ज्यादा जुर्माना पूर्वी दिल्ली के राम विहार निवासी व्यवसायी देवेन्द्र सिंह पर लगा। जिन्हें 7 लाख रुपये के जुर्माना रकम की भरपाई के बाद सजा से राहत दी गई। उनपर अपने दोस्ताना संबंधों के आधार पर 5 लाख रुपये का कर्ज लेने का आरोप था। उनका मुकदमा 3 साल से अदालत में विचाराधीन था। आखिर उन्होंने समझौता का मुकदमा सुलझा लिया।
दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण(डालसा) के अधिकारी ने बताया कि दिल्ली की जिला अदालतों में चेक बाउंस के मुकदमों की फाइलों का ढेर लगा पड़ा है। एक-एक मुकदमे पर सुनवाई पर छह महीने की तारीख दी जाती है। जिससे न्यायिक अधिकारियों समेत अन्य कर्मचारियों पर अनावश्यक काम का बोझ बढ़ रहा है। इसी के मद्देनजर जल्द ही चेक बाउंस के मुकदमों को निपटाने के लिए मेगा लोक अदालत का आयोजन किए जाने की योजना बनाई जा रही है।


जिला अदालतों में लंबित चेक बाउंस के मुकदमे: 2,33,852
सभी मामलों की सुनवाई के लिए लगी अदालतें: 84
बिजली चोरी के अलावा अन्य मामले: 3576
चेक बाउंस के निपटे मामले: 2500
सड़क दुर्घटना के मामले: 71
पीड़ितों को मिला मुआवजा: 1,41,57,580 रुपये
प्री-बार्गेनिंग के लिए आए मामले: 257
बार्गेनिंग से निपटे मामले: 153
मुकदमे से पहले ही सुलटाए मामले: 108

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