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मनरेगा के क्रियान्वयन में त्रिपुरा सबसे आगे

महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के क्रियान्वयन में त्रिपुरा ने एक बार फिर सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। यह जानकारी राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री जीतेंद्र चौधरी ने दी है।

चौधरी ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की एक प्रदर्शन रपट का हवाला देते हुए संवाददाताओं से कहा, ''मौजूदा वित्त वर्ष (2011-2012) में अभी तक प्रति व्यक्ति रोजगार दिवस मुहैया कराने के मामले में 45 दिनों का रोजगार मुहैया कराकर त्रिपुरा शीर्ष पर है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (39.19 दिवस प्रति व्यक्ति), और सिक्किम (38.39 दिवस प्रति व्यक्ति) का स्थान है।''

शीर्ष 10 राज्यों की सूची में अन्य राज्यों में हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, लक्षद्वीप, छत्तीसगढ़, गुजरात और मध्य प्रदेश शामिल हैं। मनरेगा एक वित्त वर्ष में उस प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देता है, जिसके पारिवारिक सदस्य अकुशल हाथ के काम करने के इच्छुक हों।

रपट में कहा गया है कि त्रिपुरा केंद्र सरकार से प्रति व्यक्ति कोष आवंटित कराने के मामले में और मनरेगा श्रमिकों को बैंकों के जरिए मजदूरी उपलब्ध कराने के मामले में भी शीर्ष पर है। चौधरी ने कहा है कि 2010-11 और उसके पहले के वर्ष में भी त्रिपुरा मनरेगा के तहत प्रति व्यक्ति लगभग 67 दिनों का काम मुहैया कराकर देश में शीर्ष स्थान पर था।

मनरेगा के तहत कोष आवंटन में देरी के लिए केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए चौधरी ने कहा कि इस विलम्ब के कारण देश में प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति 1०० दिनों के काम का लक्ष्य संभव नहीं है।

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  • Web Title:मनरेगा के क्रियान्वयन में त्रिपुरा सबसे आगे