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पहले से पता था ऊ ला ला.. जरूर हिट होगा: बप्पी दा

कभी बतौर संगीतकार उन्होंने काफी रंग जमाया था। यह उनके उसी सफल काम का नतीजा है कि नये दौर के संगीतकार भी उन्हें बराबर याद करते रहते हैं। दूसरी तरफ कभी ये शब्द उनके संबोधन से जुड़ गये थे। कोई कहता था-कॉपी लाहिड़ी तो कोई -गप्पी लाहिड़ी। तब उनके बारे में यह मशहूर हो गया था कि वह सिर्फ विदेशी म्यूजिक की कॉपी करते हैं। ऐसी बातें सुन कर बप्पी दा गंभीर हो जाते हैं।

हमेशा की तरह इस साल भी संगीतकार बप्पी लाहिड़ी ने अपना जन्मदिन कुछ खास दोस्तों के साथ मनाया। इसके साथ उनकी दो बड़ी खुशियां जुड़ी हुई थीं। पिछले दिनों जारी उनके जैज म्यूजिक एलबम वॉकिंग ऑन लव स्ट्रीट के गानों ने विदेश के म्यूजिक चार्ट में अपना नाम दर्ज किया है। दूसरी ओर देश में डर्टी पिक्चर में गाये उनके गाने ऊ ला ला.. की लोकप्रियता अच्छा समां बांध रही है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि उनकी गायिकी संगीत की सारी कसौटियों से बहुत दूर है, पर उनके कई हिट गानों ने उन्हें आज के संगीतकारों के बहुत करीब ला दिया है।  इस बारे में बप्पी दा कहते हैं, ‘मैंने 1977 में विनोद खन्ना के लिए फिल्म आपकी खातिर के लिए एक गाना बंबई से आया मेरा दोस्त.. गाया था। यह खूब पसंद किया गया। इसके बाद जैसे ऊपर वाले की दुआ थी। 1982 में अमिताभ बच्चन के लिए गाया नमक हलाल का गाना रात बाकी बात बाकी.., 1990 में संजय दत्त के लिए गाया थानेदार का गाना तम्मा तम्मा लोगे.., 2006 में जॉन अब्राहम के लिए गाया टैक्सी नंबर 9211 का गाया गाना बंबई नगरिया.. सहित मैंने हर पुराने और नये जिन भी सितारों  के लिए अपनी आवाज दी, आज भी स्टेज शो में उन गानों की बहुत डिमांड है।’

फिलहाल तो ऊ ला ला.. की वजह से गायक के उनके अवतार को ही पसंद किया जा रहा है। बप्पी दा हंस कर बताते हैं, ‘यह गाना 80 के दशक के गाने की याद दिलाता है। उस दौर में जितेंद्र, श्रीदेवी, जयाप्रदा की फिल्मों के लिए मैंने ऐसे बहुत सारे गाने तैयार किये थे। ऊ ला ला.. भी एकदम उसी स्टाइल का गाना है। इस गाने की धुन सुनते ही मैंने विशाल शेखर से कह दिया था, ‘याद कर ले, तेरा यह गाना शर्तिया हिट होगा। पर मुझे इस बात की जरा भी उम्मीद नहीं थी कि फिल्म के रिलीज होने से पहले ही यह इस कदर हिट हो जायेगा।’

जाहिर है अब यह खुशी उनके चेहरे पर छलक रही है। वे कहते हैं, ‘रहमान से लेकर विशाल-शेखर तक जो भी म्यूजिक डायरेक्टर मुझे गाने के लिए बुलाता है, मैं चला जाता हूं। अच्छा लगता है, मेरे संगीत सृजन को एक नया आयाम मिल रहा है।’ वैसे कभी बतौर संगीतकार उन्होंने काफी रंग जमाया था। यह उनके उसी सफल काम का नतीजा है कि नये दौर के संगीतकार भी उन्हें बराबर याद करते रहते हैं। हालांकि कभी उनके साथ ये संबोधन जुड़ गये थे। कोई कहता था-कॉपी लाहिड़ी तो कोई-गप्पी लाहिड़ी। तब उनके बारे में यह मशहूर हो गया था कि वह सिर्फ विदेशी म्यूजिक की कॉपी करते हैं। 450 से ज्यादा फिल्मों का संगीत दे चुके बप्पी दा ऐसे सवालों को सुन कर गंभीर हो जाते हैं।

वह कहते हैं, ‘जो लोग मुझे कॉपी कैट कहते हैं, वह जरा अपने दामन में झांकें। आज तो हो यह रहा है कि सीधे-सीधे विदेशी गानों को उठा लिया जाता है। मगर हम हमेशा नकल की बात से पीछे हटते रहे हैं, हां प्रेरणा जरूर ली है। मुझे यह प्रेरणा शंकर-जयकिशन, पंचम दा के साथ-साथ कई लोगों से मिलती रही है। मैंने अपनी जमीन खुद तैयार की है।’

अब ऊ ला ला.. के बाद से उनसे गाना गवाने के लिए हर नया संगीतकार बेताब है। विशाल-शेखर, शंकर-एहसान-लॉय आदि सभी के पास बप्पी दा के लिए एक स्पेशल धुन है। बप्पी दा फिल्मोद्योग की इस भेड़चाल से अच्छी तरह से वाकिफ हैं, ‘मैंने कहा न, मैं हर गाना नहीं गाना चाहता। नये गायकों को मुझसे घबराने की जरूरत नहीं है।’ वह पुराने दिनों को कुरेदते हुए बताते हैं, ‘मेरे करियर में एक दौर ऐसा भी आया था, जब मेरी संगीतबद्घ 14 फिल्में लाइन से हिट हुई थीं। एक साल में 37 फिल्मों में संगीत देने की वजह से गिनीज वर्ल्ड ऑफ रिकार्डस में भी मेरा नाम आया था। वैसे अपने ट्रॉफी और रिकॉर्ड के बारे में ज्यादा बात करना उन्हें पसंद नहीं। बस, उन्हें सिर्फ इस बात का दुख है कि मिथ्या प्रचार के जरिये हमेशा उनके सृजन को छोटा साबित करने की कोशिश की गई है। वह कहते हैं, ‘मैं हमेशा अपनी क्रिएशन को लेकर मशगूल रहना चाहता हूं, बाकी कौन क्या मेरे बारे में कह रहा है, इसकी मुझे जरा भी परवाह नहीं है।

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