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मुझे तो बोलने के पैसे मिल रहे हैं

जावेद अख्तर को इस सीजन में फिल्मकार महबूब खान की कहानी सबसे ज्यादा नाटकीय नजर आती है। महबूब खान गुजरात से अपनी जेब में तीन रुपये लेकर मुंबई आए थे। वह स्टूडियो के बाहर फिल्म निर्देशक से मिलने के लिए खड़े रहते थे। 25 साल बाद उन्होंने ‘मदर इंडिया’ बनाई।

कुछ वर्ष पहले सोनी टीवी पर ‘इंडियन आइडल 4’ में जज बनकर आ चुके मशहूर लेखक व गीतकार जावेद अख्तर अब जी क्लासिक पर एक शो ‘क्लासिक लीजेंड’ का संचालन करते दिखाई देंगे। हर एपिसोड में वह उन दिग्गज फिल्मी हस्तियों के साथ अपने निजी अनुभवों से दर्शकों को अवगत कराएंगे। इस कार्यक्रम में राज कपूर, आर. डी. बर्मन, मजरूह सुल्तानपुरी, किशोर कुमार, नरगिस, बिमल रॉय, विजय आनंद, अशोक कुमार, साहिर लुधियानवी, महबूब खान, मधुबाला, गुरुदत्त और शम्मी कपूर जैसी बॉलीवुड की 13 महान हस्तियों के निजी और पेशेवर अनुभवों के बारे में बताया जाएगा। शो के बारे में जावेद अख्तर कहते हैं- ‘सच यह है कि मुझे उस विषय पर बोलने के लिए पैसे दिए जा रहे हैं, जिस पर बोलना मुझे बहुत अच्छा लगता है। सिनेमा का युवा प्रेमी होने के नाते मैं इन लीजेंड लोगों के बारे में हमेशा छोटी से छोटी जानकारी इकट्ठा किया करता था। अब वही जानकारी मैं दर्शकों को बताने वाला हूं। इनमें से बॉलीवुड की कुछ महान हस्तियां ऐसी हैं, जिनसे मुझे निजी रूप से मिलने का ही नहीं, बल्कि कुछ हस्तियों के साथ काम करने का मौका भी मिला है। मसलन, जब मैं बॉलीवुड में आया, उस वक्त साहिर लुधियानवी स्थापित गीतकार थे। मैंने यहां पर अपने संघर्ष की शुरुआत करते हुए उनके साथ काम करना शुरू किया। उस वक्त तक गीतकार के रूप में उनका करियर 35 वर्ष पुराना हो चुका था। यानी कि वह कितने अनुभवी रहे होंगे, इसका आप अंदाजा लगा सकते हैं। इसके बावजूद वह विनम्र इंसान थे।’

‘क्लासिक लीजेंड’ के लगभग सभी एपिसोड फिल्माए जा चुके हैं। पर सबसे पहला एपिसोड किस महान हस्ती पर होगा, यह अभी तक राज बना हुआ है। जावेद अख्तर का मानना है कि इस बारे में उनके पास कोई जानकारी नहीं है। यह निर्णय तो चैनल को ही करना है। वह आगे कहते हैं- ‘इस 13 एपिसोड के शो में तमाम हस्तियां रह जाएंगी, जिनके बारे में बताने के लिए हम इस शो का दूसरा सीजन लेकर आने की सोच रहे हैं। इस सीजन में मुझे फिल्मकार महबूब खान की कहानी सबसे ज्यादा नाटकीय नजर आती है। महबूब खान गुजरात से अपनी जेब में तीन रुपये लेकर मुंबई आए थे। वह स्टूडियो के बाहर फिल्म निर्देशक से मिलने के लिए खड़े रहते थे। पर उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा। एक-एक ईंट जोड़ते हुए उन्होंने अपना महल खड़ा किया। पूरे 25 साल बाद 1957 में उन्होंने बॉलीवुड को ‘मदर इंडिया’ जैसी फिल्म दी।’ इस शो को पेश करने का मकसद बॉलीवुड के सुनहरे दौर को याद करना है। 

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